छत्तीसगढ़

रायपुर में पकड़ी गईं विदेशी युवतियां पहुंची हाई कोर्ट, केंद्र और राज्य से दो हफ्ते में मांगा जवाब


अवैध रूप से भारत में रह रही उज्बेकिस्तान की दो युवतियों की हिरासत के मामले में हाई कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 30 Apr 2026 10:31:41 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Apr 2026 10:31:41 PM (IST)

रायपुर में पकड़ी गईं विदेशी युवतियां पहुंची हाई कोर्ट, केंद्र और राज्य से दो हफ्ते में मांगा जवाब
रायपुर में पकड़ी गईं विदेशी युवतियां पहुंची हाई कोर्ट

HighLights

  1. कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दो सप्ताह में मांगा जवाब
  2. 14 जनवरी से अवैध हिरासत में रखा गया, नहीं की गई कानूनी प्रक्रिया पूरी
  3. इंटेलिजेंस ब्यूरो कर रही है मामले की जांच, डिटेंशन सेंटर में रखने पर उठे सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अवैध रूप से भारत में रह रही उज्बेकिस्तान की दो युवतियों की हिरासत के मामले में हाई कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता युवतियों को भी अपना जवाब पेश करने कोर्ट ने निर्देश दिए हैं। मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक होटल में दो उज्बेकिस्तान की युवतियां अवैध रूप से रह रही हैं।

युवतियों ने लगाया गैरकानूनी हिरासत का आरोप

सूचना के आधार पर पुलिस ने फरवरी 2026 में दोनों युवतियों को हिरासत में लिया था। मामला विदेशी नागरिकों से जुड़ा था इसलिए इसकी जांच आगे इंटेलिजेंस ब्यूरो को सौंप दी गई। इस मामले में युवतियों ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। इसमें आरोप लगाया है कि उन युवतियों को 14 जनवरी 2026 से लगातार हिरासत में रखा गया जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें बिना औपचारिक गिरफ्तारी के रायपुर सेंट्रल जेल के डिटेंशन सेंटर में रखा गया और उन्हें किसी भी मजिस्ट्रेट या न्यायिक अधिकारी के सामने पेश नहीं किया गया है।

कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन पर उठे सवाल

हिरासत में रखने के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि गिरफ्तारी के समय कोई स्पष्ट केस दर्ज नहीं था और बाद में एफआइआर दर्ज की गई, जिससे हिरासत की वैधता पर सवाल उठते हैं। याचिका में यह भी बताया है कि दोनों युवतियां टूरिस्ट के रूप में भारत आई थीं और उनके पास वैध पासपोर्ट था। वीजा का समाप्त होना केवल एक तकनीकी त्रुटि बताई गई है। वकीलों का कहना है कि बिना अदालत में पेश किए लंबे समय तक हिरासत में रखना संविधान और आपराधिक न्याय व्यवस्था के नियमों का उल्लंघन है। राज्य और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

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