छत्तीसगढ़ में 85 हजार शिक्षकों पर सस्पेंस, सेवारत शिक्षकों के लिए अलग TET की मांग, दूसरे राज्यों की तैयारी से बढ़ी उम्मीद

प्रदेश में करीब 85 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक शामिल हैं, जो लंबे समय से सेवा दे रहे ह…और पढ़ें

HighLights
- छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कदम
- शिक्षा मंत्री को सौंपा 5 सूत्रीय मांग पत्र
- अन्य राज्यों की तर्ज पर हो अलग परीक्षा
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद देश के कई राज्यों ने लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को पात्रता हासिल करने के लिए अलग अवसर देने की तैयारी शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष या अलग टीईटी आयोजित करने की व्यवस्था पर काम चल रहा है।
85 हजार शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी
वहीं छत्तीसगढ़ में अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि सेवारत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी आयोजित की जाएगी या उन्हें नियमित सीजी टीईटी में ही शामिल होना होगा। प्रदेश में करीब 85 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक शामिल हैं, जो लंबे समय से सेवा दे रहे हैं।
राज्य सरकार के निर्णय पर टिकी नजर
ऐसे में इन शिक्षकों की नजर राज्य सरकार के निर्णय पर टिकी हुई है। शिक्षकों का कहना है कि अलग टीईटी का अवसर मिलने से उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए स्पष्ट दिशा मिलेगी और वर्षों की सेवा के बावजूद पात्रता परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता भी दूर होगी।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सौंपा पांच सूत्रीय मांग पत्र
इधर, शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सौंपा पांच सूत्रीय मांग पत्र। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने टीईटी को लेकर पांच सूत्रीय मांग पत्र शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और डीपीआई संचालक को सौंपा है। मोर्चा ने सेवारत शिक्षकों के लिए अलग विभागीय टीईटी आयोजित करने सहित अन्य मांगें रखी हैं।
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ये प्रमुख मांगें
- सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को टीईटी योग्यता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। मोर्चा ने मांग की है कि इस अवधि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में बिना टीईटी योग्यता वाले शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति की जाए और पदोन्नति आदेश को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रखा जाए।
- केवल सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से विभागीय टीईटी आयोजित की जाए। परीक्षा का आयोजन डीपीआई या एससीईआरटी के माध्यम से कराया जाए और परीक्षा केंद्र विकासखंड स्तर पर बनाए जाएं, ताकि संबंधित विकासखंड के शिक्षक आसानी से परीक्षा में शामिल हो सकें।
- सेवारत शिक्षकों के लिए परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत निर्धारित किया जाए।
- सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने के लिए केंद्र स्तर पर अध्यादेश लाने अथवा नियमों में संशोधन की पहल की जाए। इसके लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार के शिक्षा विभाग, एनसीटीई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजे।
- लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीईटी की पात्रता हासिल करने के लिए पर्याप्त और व्यावहारिक अवसर उपलब्ध कराया जाए, ताकि पदोन्नति सहित सेवा संबंधी प्रक्रियाओं में अनिश्चितता समाप्त हो सके।



