छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जशपुर जिले के फरसाबहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की संख्या बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने अदालत को बत…और पढ़ें
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 09:43:47 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Sep 2026 09:43:47 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
- जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने किया मामले का निराकरण।
- लोगों को मिली पुख्ता स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी सौगात।
- फरसाबहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदली तस्वीर।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः जशपुर जिले के फरसाबहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में विशेषज्ञ डाक्टरों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डाक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने बताया कि अब फरसाबहार सीएचसी में डाक्टर पदस्थ हैं और उच्च अध्ययन के लिए गए दो चिकित्सक भी ड्यूटी पर लौट चुके हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने आदेश पारित किया। यह जनहित याचिका कुनकुरी, जिला जशपुर निवासी अधिवक्ता विष्णु प्रसाद कुलदीप द्वारा दायर की गई थी। याचिका में फरसाबहार सीएचसी में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, जिसमें एनेस्थीसिया, पब्लिक हेल्थ, सर्जरी, मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा शिशु रोग के विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति की मांग शामिल थी।
हाई कोर्ट के 8 अप्रैल 2024 के निर्देश के बाद जिला जशपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 3 मई 2024 को शपथपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि फरसाबहार सीएचसी में तीन मेडिकल आफिसर पदस्थ थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट का ध्यान 23 अप्रैल 2024 को प्रकाशित जशपुर भास्कर की खबर की ओर भी दिलाया गया, जिसमें बताया गया कि पत्थलगांव सिविल अस्पताल में डायलिसिस करा रहे एक मरीज की बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद मौत हो गई थी।
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याचिका निराकृत
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने 7 जुलाई 2024 को शपथपत्र दाखिल कर बताया कि डा. नीरज गुप्ता और डा. विश्वकांत प्रधान को फरसाबहार सीएचसी में स्थानांतरित कर पदस्थ किया गया है। अब सभी संबंधित डॉक्टर ड्यूटी पर हैं। कोर्ट ने राज्य की ओर से उठाए गए कदमों को देखते हुए जनहित याचिका का निराकरण किया।
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