छत्तीसगढ़ महतारी को निमंत्रण पत्र में जगह नहीं, कांग्रेस ने सरकार पर लगाया दोहरे रवैये का आरोप

जशपुर में राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़ महतारी का छायाचित्र शामिल नहीं किए जाने को लेकर कांग्रेस ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी जशपुर के महामंत्री मनमोहन भगत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, स्वाभिमान और अस्मिता से जुड़ा एक गंभीर विषय करार दिया है।

मनमोहन भगत ने अपने बयान में कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी केवल एक छायाचित्र या प्रतिमा नहीं हैं, बल्कि वे प्रदेश की संस्कृति, परंपरा, गौरव और पहचान का प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली पहचान का उत्सव है, और ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन के निमंत्रण पत्र से छत्तीसगढ़ महतारी का छायाचित्र गायब होना कई अनुत्तरित प्रश्न खड़े करता है।
भगत ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि आखिर जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ शासन को छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा एवं छायाचित्र से इतनी चिढ़ क्यों है? उन्होंने पूछा कि क्या राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में उन्हें स्थान नहीं देना प्रदेश की जनता की भावनाओं और अस्मिता की अनदेखी नहीं है? उन्होंने प्रशासन और सरकार से इस पूरे मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए मनमोहन भगत ने कहा कि एक तरफ सरकार छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित करने की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीकों में शामिल छत्तीसगढ़ महतारी को राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में जगह नहीं दी जाती। उन्होंने इसे सरकार के दोहरे रवैये का स्पष्ट प्रमाण बताया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार दिवस मनाने वाली इस सरकार से छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक प्रतीकों की ऐसी उपेक्षा की उम्मीद ही की जा सकती है। भगत ने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि अपनी माटी, संस्कृति और महतारी के सम्मान को लेकर सरकार की वास्तविक प्राथमिकताएं आखिर क्या हैं।
मनमोहन भगत ने जिला प्रशासन एवं छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़ महतारी का छायाचित्र शामिल नहीं किए जाने पर तत्काल स्पष्टीकरण दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता से जुड़े सभी प्रतीकों को उचित सम्मान दिया जाए।
उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी का सम्मान प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश की अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीकों की किसी भी स्थिति में अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।




