छत्तीसगढ़
सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ा अपडेट! अब EOW को सौंपी जा सकती है जांच, DGP बोले- मामला गंभीर


जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, अस्पताल में किसी व्यक्ति की मौत की जानकारी मिलते ही गिरोह सक्रिय हो जाता था। इसके बाद मौत को सर्पदंश से जोड़कर फर्जी केस तैयार किया जाता था। बताया गया है कि मुआवजा दिलाने के नाम पर करीब 1.5 लाख रुपए तक की सेटिंग की जाती थी। इसके बाद सरकारी योजना के तहत मिलने वाली राशि को हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी। अब EOW या किसी अन्य विशेषज्ञ एजेंसी को जांच सौंपे जाने के बाद इस कथित नेटवर्क में शामिल लोगों, पैसों के लेन-देन और सरकारी रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ियों की भी विस्तृत पड़ताल हो सकती है।



