छत्तीसगढ़

सहारा निवेशकों को रिफंड पोर्टल के माध्यम से मिलेगी राशि : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहारा इंडिया के विभिन्न कोआपरेटिव सोसायटियों में फंसे जमाकर्ताओं की याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि निवेशक केंद्र सरकार के ‘सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल’ के माध्यम से अपनी परिपक्वता राशि का दावा कर सकते हैं।

यह याचिका मुख्य रूप से कोरिया-बैकुंठपुर और अनूपपुर-बिजुरी के मध्यमवर्गीय जमाकर्ताओं द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं में राम मूर्ति नायडू, भूदेव प्रसाद, मनोरमा देवी, सोली और अनीता बर्मन शामिल हैं, जिन्होंने सहारा इंडिया की स्थानीय शाखाओं में फिक्स्ड डिपाजिट व अन्य स्कीमों में पैसे जमा किए थे।

जब सहारा प्रबंधन ने अवधि पूरी होने के बाद भी ब्याज सहित उनका मूलधन नहीं लौटाया, तो उन्होंने कानूनी नोटिस भेजा। राशि का भुगतान न होने पर उन्होंने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीपक गुप्ता और केंद्र सरकार की ओर से साक्षी मलिक उपस्थित रहीं। सहारा और केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि सहारा रिफंड का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।

सुप्रीम कोर्ट की त्रिस्तरीय रिफंड व्यवस्था

1. सहारा-सेबी रिफंड खाते में जमा 24,979.67 करोड़ में से 5,000 करोड़ की पहली किस्त केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को ट्रांसफर की गई है।

2. यह राशि निवेशकों के आधार-लिंक बैंक खातों में पारदर्शी तरीके से वितरित की जा रही है।

3. रिफंड प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।

4. केंद्र सरकार ने 18 जुलाई 2023 को ‘सहारा रिफंड पोर्टल ‘लान्च किया है।

हाईकोर्ट का अंतिम फैसला

न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस मामले की निगरानी कर रहा है, इसलिए उच्च न्यायालय द्वारा कोई अलग आदेश पारित करना उचित नहीं होगा। अदालत ने याचिका को समाप्त कर दिया, लेकिन निवेशकों को भविष्य में किसी विषम परिस्थिति में दोबारा उच्च न्यायालय की शरण लेने की स्वतंत्रता दी है। तब तक के लिए उन्हें रिफंड पोर्टल के माध्यम से अपनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।



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