Gurugram AI Engineer Death Case

छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले AI इंजीनियर श्रेष्ठ मलिक की मौत का मामला अब नया मोड़ ले रहा है। गुरुग्राम में महिला सहकर्मी इशाका की हत्या और उसके बाद रेलवे ट्रैक पर श्रेष्ठ का शव मिलने के मामले में पिता दीपक मलिक ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले ही
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श्रेष्ठ के पिता दीपका मलिक का कहना है कि अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं, फिर भी एकतरफा कहानी पेश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा ऐसा नहीं था। पूरी जांच होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं है।
दीपक मलिक का आरोप है कि बेटे की मौत के बाद जब वे गुरुग्राम पहुंचे, तो उन्हें कंपनी के अंदर तक नहीं जाने दिया गया। वे श्रेष्ठ के साथ काम करने वाले किसी सहकर्मी या टीम के सदस्य से भी बात नहीं कर सके। उन्होंने श्रेष्ठ और महिला सहकर्मी के बीच लव अफेयर या लिव-इन रिलेशनशिप की चर्चाओं को भी गलत बताया।
इधर, करीब दो हफ्ते पहले हुई इस घटना की जांच अभी जारी है। पुलिस कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल और लैपटॉप की जांच कर रही है। परिवार का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी एक कहानी पर भरोसा करना जल्दबाजी होगी।

भिलाई के इंजीनियर की गुरुग्राम में हुई मौत।
पिता बोले- मेरा बेटा हिंसक नहीं था, उसे हत्यारा मत कहिए
दैनिक भास्कर डिजिटल से बातचीत में श्रेष्ठ मलिक के पिता दीपक मलिक ने कहा कि उनका बेटा हमेशा अपने करियर और काम को लेकर ही बात करता था। परिवार से उसकी बातचीत 15-20 दिन में एक बार होती थी। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ ने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया, जिससे लगे कि वह किसी की जान ले सकता है।
दीपक मलिक ने कहा कि घटना के बाद जिस तरह की खबरें सामने आईं, उनमें एकतरफा यह नैरेटिव बनाया जा रहा है कि श्रेष्ठ ने हत्या की। जबकि उनका कहना है कि उनका बेटा ऐसा नहीं था और उसके स्वभाव में हिंसा बिल्कुल नहीं थी।
उन्होंने कहा, “मेरी सिर्फ एक ही इच्छा है कि पुलिस निष्पक्ष जांच करे और पता लगाए कि इस घटना के पीछे असली वजह क्या थी। आखिर उस रात क्या हुआ? यदि कोई कारण था या किसी ने उसे उकसाया था, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि जिस युवती की मौत हुई, वह घटना से ठीक पहले श्रेष्ठ के कमरे में रहने आई थी।
युवती ने दो दिन पहले ही खाली किया था कमरा
पिता ने कहा कि जिस युवती की हत्या की बात कही जा रही है, उसने घटना से दो दिन पहले ही अपना कमरा खाली कर दिया था। अगर उसे कमरा छोड़ना पड़ा था, तो वह किसी महिला मित्र के यहां, होटल में या अपने घर भी जा सकती थी। फिर वह सीधे श्रेष्ठ के कमरे में ही क्यों पहुंची?
उन्होंने कहा कि घटना से पहले के 12 से 14 घंटे में क्या हुआ, इसकी पूरी कड़ी समझना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, इसी से इस मामले की सच्चाई सामने आएगी। दोनों के प्रेम संबंध और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की बातें भी सामने आईं। हालांकि पिता ने इन दावों को स्वीकार करने से इनकार किया।

श्रेष्ठ का शव रेलवे ट्रैक पर दो हिस्सों में मिला था।
पिता बोले- सहकर्मियों से मिलने तक नहीं दिया
दीपक मलिक ने कहा कि बेटे की मौत की जानकारी मिलने के बाद वह गुरुग्राम पहुंचे थे, लेकिन उन्हें कंपनी परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसके बाद वह कंपनी के गेट के बाहर ही बैठ गए। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से केवल लीगल डिपार्टमेंट का एक प्रतिनिधि और सिक्योरिटी इंचार्ज उनसे मिलने आए।
हालांकि उन्हें बेटे के किसी भी सहकर्मी से बात करने की अनुमति नहीं दी गई। दीपक मलिक का कहना है कि अगर उन्हें सहकर्मियों से बात करने का मौका मिलता, तो जांच में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती थीं।
परिवार को अब तक नहीं मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
पिता ने कहा कि हमें अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी नहीं मिली है। पुलिस ने जो सामान जब्त किया है, उसे कब लौटाया जाएगा, इसकी भी कोई जानकारी नहीं दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल और लैपटॉप की जांच से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
उनका कहना है कि वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन चाहते हैं कि पुलिस जांच को किसी एक थ्योरी तक सीमित न रखे। अगर मोबाइल, लैपटॉप, कॉल रिकॉर्ड या अन्य डिजिटल सबूतों से कोई नई जानकारी सामने आती है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर तीसरे व्यक्ति की संभावित भूमिका या किसी अन्य एंगल से भी मामले की पड़ताल की जाए। उनकी मांग है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी को दोषी माना जाए।
NIT रायपुर से इंजीनियरिंग, AI इंजीनियर के तौर पर पहली नौकरी
श्रेष्ठ मलिक ने NIT रायपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इंटर्नशिप पूरी करने के बाद उन्होंने पिछले साल जुलाई में गुरुग्राम स्थित Optum Global Solutions में AI इंजीनियर के रूप में अपनी पहली नौकरी शुरू की थी। कुछ ही दिनों में उनकी नौकरी का एक साल पूरा होने वाला था।
पिता दीपक मलिक ने बताया कि श्रेष्ठ पढ़ाई में काफी अच्छा था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहता था। उनके मुताबिक, वह अपने काम और करियर को लेकर हमेशा गंभीर रहता था।
जानिए क्या है पूरा मामला?
भिलाई के जामुल निवासी 25 साल का श्रेष्ठ मलिक और उत्तर प्रदेश के सीतापुर की रहने वाली इशाका गुरुग्राम स्थित Optum Global Solutions में साथ काम करते थे। गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, दोनों एक-दूसरे को जानते थे। घटना से कुछ दिन पहले इशाका श्रेष्ठ के पीजी में रहने आई थी।
12 जुलाई को इशाका के रिश्तेदारों ने पुलिस को सूचना दी कि वह फोन नहीं उठा रही है। इसके बाद पुलिस सेक्टर-55 स्थित पीजी पहुंची, जहां कमरे के अंदर इशाका का शव मिला। शुरुआती जांच में चाकू से कई वार कर हत्या किए जाने की बात सामने आई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि उसी कमरे में श्रेष्ठ मलिक भी रहता था। उसकी तलाश शुरू की गई तो जानकारी मिली कि एक दिन पहले गुरुग्राम रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से कटे एक युवक का शव मिला था। मोबाइल की पहचान के आधार पर उसकी पहचान श्रेष्ठ मलिक के रूप में हुई।
पुलिस फिलहाल शुरुआती जांच के आधार पर हत्या के बाद आत्महत्या की आशंका जता रही है। वहीं, श्रेष्ठ का परिवार इस निष्कर्ष से सहमत नहीं है। परिवार का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल सबूत सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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