छत्तीसगढ़

सेवाकाल में राजपत्रित अफसर से नहीं की जा सकती वेतन वसूली: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सेवाकाल के दौरान किसी राजपत्रित अधिकारी से अधिक वेतन भुगतान के नाम पर वसूली नहीं की जा सकती। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 11 May 2026 02:38:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 May 2026 02:39:58 PM (IST)

सेवाकाल में राजपत्रित अफसर से नहीं की जा सकती वेतन वसूली: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

HighLights

  1. हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी
  2. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
  3. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सेवाकाल के दौरान किसी राजपत्रित अधिकारी से अधिक वेतन भुगतान के नाम पर वसूली नहीं की जा सकती। कोर्ट ने डीएसपी राजेश कुमार शर्मा के खिलाफ जारी रिकवरी आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वसूली गई राशि तत्काल उनके बैंक खाते में वापस जमा कराई जाए।

राजेश कुमार शर्मा पुलिस मुख्यालय, रायपुर में डीएसपी पद पर पदस्थ थे। पुलिस महानिरीक्षक, गुप्तवार्ता रायपुर ने सेवाकाल के दौरान अधिक वेतन भुगतान का हवाला देते हुए उनके वेतन से रिकवरी का आदेश जारी किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए डीएसपी शर्मा ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ में हुई।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कोर्ट को बताया कि पूर्व सेवाकाल में गलत तरीके से वेतनवृद्धि लगाए जाने के आधार पर रिकवरी आदेश जारी किया गया, जबकि इसमें अधिकारी की कोई गलती नहीं थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों स्टेट आफ पंजाब बनाम रफीक मसीह (2015), थामस डेनियल बनाम स्टेट ऑफ केरल (2022) और जोगेश्वर साहू बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2025) का हवाला दिया।

इन फैसलों में स्पष्ट कहा गया है कि सरकारी अधिकारी या कर्मचारी से पांच वर्ष से अधिक पुराने अधिक वेतन भुगतान की वसूली सेवाकाल के दौरान नहीं की जा सकती।

बिना गलती कर्मचारी से वर्षों बाद वसूली करना नियम विरुद्ध

अधिवक्ता पांडेय ने कोर्ट को बताया कि डीएसपी शर्मा के मामले में वर्ष 2002 से अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर रिकवरी आदेश जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि यह भुगतान विभागीय स्तर पर गलत वेतनवृद्धि लगाए जाने के कारण हुआ था न कि किसी धोखाधड़ी या गलत जानकारी के आधार पर। उन्होंने दलील दी कि कर्मचारी की बिना गलती के वर्षों बाद वसूली करना पूरी तरह नियम विरुद्ध है।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि रिकवरी आदेश जारी करने से पहले न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आईजी गुप्तवार्ता द्वारा जारी रिकवरी आदेश को रद कर दिया। साथ ही राज्य शासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता से वसूली गई राशि तत्काल उनके बैंक खाते में जमा कराई जाए।



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!