नईदुनिया प्रतिनिधि, रायगढ़: केलो बांध से पानी छोड़े जाने के बाद शहर में एक बार फिर जलभराव ने यातायात व्यवस्था की सांसें रोक दीं। चक्रपथ के डूबते ही शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया और देखते ही देखते सड़कें जाम के शिकंजे में आ गईं। चक्रपथ डूबते ही ओवरब्रिज, शहीद चौक, कलेक्ट्रेट मार्ग, जेल परिसर क्षेत्र, गोपी टॉकीज और दक्षिण चक्रधर नगर मार्ग में वाहनों की लंबी कतार लग गई। हालात ऐसे रहे कि लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में भी काफी समय लग गया।
करीब एक घंटे तक लोग जाम में फंसे रहे और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आई। इस जाम अधिकारी कर्मचारी स्कूली बस से लेकर आपातकाल सेवा एम्बुलेंस तक कि चाल थम गई।
चक्रपथ शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक आवागमन का महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग है। इसके डूबने के बाद पूरा यातायात सीमित प्रमुख मार्गों पर आ गया। नतीजा यह हुआ कि पहले से व्यस्त सड़कों पर वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ गया।
चारपहिया वाहनों के साथ दोपहिया चालक भी जाम में फंसे नजर आए। इन सभी परिस्थितियों के बीच जाम में लोगों के वाहनों की रेलमपेल पर थी लेकिन जाम में फंसे लोग जागरूकता का परिचय देना छोड़ कर आगे बढ़ाने लगे। यह स्थिति और जाम खुलने के बजाए और लगती रहे। इस तरह जागरूक भाव नदारद रहने से जाम की स्थिति और विकराल बनती नजर आई है।
नतीजा यह रहा कि जिस सड़क से कुछ ही मिनट में रास्ता तय हो सकता था, वहां लोगों को लंबे समय तक जाम में खड़े रहना पड़ा। बहरहाल इस जाम के चलते लोगों को होने वाली समस्याओं के बीच कई तरह की चर्चाओं का दौर चलने लगा है जिसमें चक्रपथ की ऊंचाई तो बढ़ाया गया था लेकिन फिर भी वह डूब गया इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है की नदी गहराई को मलबे से पाटना एवं चौड़ाई को विभिन्न निर्माण से प्रभावित करना भारी पड़ रहा है।
यहां यह भी बताया जाना लाजमी होगा कि विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए केलो नदी के बहाव को रोका गया था बड़े स्तर में मालवा नदी में डाला गया था, जिसे बारिश से पूर्व निकाला नही गया यही वजह रह की इससे नदी गहराई और चौड़ाई प्रभावित हुई है और चक्रपथ डूब गया जिससे जाम की स्थिति उतपन्न हो गई।
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नदी की चौड़ाई-गहराई से छेड़छाड़, चक्रपथ डूबने पर बढ़ी मुसीबत
केलो नदी की प्राकृतिक चौड़ाई और गहराई में लगातार हो रही छेड़छाड़ को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। नदी का जल प्रवाह प्रभावित होने और पानी के फैलाव के कारण कम जलस्तर में भी आसपास के हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है।
चक्रपथ के डूबने की समस्या को भी इसी व्यापक नदी प्रबंधन और जल निकासी व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल यह है कि शहर की महत्वपूर्ण सड़क को बार-बार डूबने से बचाने के लिए स्थायी समाधान कब किया जाएगा।
चक्रधर नगर रेलवे फाटक ने बढ़ाई जाम की परेशानी
चक्रपथ बंद होने के बाद यातायात का दबाव चक्रधर नगर रेलवे फाटक वाले मार्ग पर भी बढ़ गया। ऊपर से ट्रेनों के गुजरने के दौरान फाटक के बार-बार बंद होने से वाहनों की कतार और लंबी होती गई। कुछ ही देर में फाटक के दोनों ओर वाहनों का जमावड़ा लग गया। फाटक खुलने के बाद भी वाहनों की संख्या इतनी अधिक रही कि यातायात सामान्य होती तब तक एक और ट्रेन आने की सिग्नल से फिर फाटक बंद हो गया। ऐसे में जलभराव और रेलवे फाटक की समस्या ने मिलकर शहरवासियों की परेशानी दोगुनी कर दी।
जाम में फंसे तो नियम भी भूले
जाम के बीच कई वाहन चालक जल्द निकलने की होड़ में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करते नजर आए। व्यवस्थित तरीके से लेन में चलने के बजाय वाहन जहां जगह मिली, वहीं घुसते गए। इससे सड़क पर वाहनों की रेलमपेल बढ़ती गई और जाम खुलने के बजाय और उलझता चला गया।
यातायात का दबाव तो परिस्थितियों की मजबूरी थी, लेकिन वाहन चालकों की जल्दबाजी और अव्यवस्थित तरीके से आगे निकलने की कोशिश ने समस्या को और विकराल कर दिया।
दिन भर यातायात और पुलिस टीम करती रही मशक्कत
बिगड़ी यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए दिनभर यातायात और पुलिस टीम सड़कों पर डटी रही। प्रमुख चौक-चौराहों और जाम प्रभावित मार्गों पर जवानों ने मोर्चा संभालकर वाहनों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। कहीं वाहनों को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट किया गया तो कहीं सड़क पर फंसे वाहनों को व्यवस्थित कर यातायात बहाल कराने की कोशिश होती रही। इसके बावजूद वाहनों का लगातार बढ़ता दबाव पुलिस और यातायात अमले के लिए चुनौती बना रहा।
चक्रपथ बंद होने से शहर के सीमित मार्गों पर बढ़े दबाव के कारण कई स्थानों पर बार-बार जाम की स्थिति बनती रही। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचकर यातायात को नियंत्रित करते रहे, लेकिन वाहनों की भारी संख्या के आगे व्यवस्था को सामान्य करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।