Uncategorized

पहली बार रायपुर में ‘ताना-बाना समारोह’, ‘कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर’ के साथ पारंपरिक कला को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा रेशम बुनाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की आजीविका एवं सामाजिक विकास पहल कोसाला ने राजधानी रायपुर में एक महत्वपूर्ण ‘ताना-बाना समारोह’ का आयोजन किया। इस अवसर पर ‘कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर’ का भी विधिवत शुभारंभ किया गया। यह नया केंद्र कोसा की यात्रा, कारीगर समुदायों के साथ कोसाला के कार्यों और आजीविका से जुड़ी पहलों के सकारात्मक असर को करीब से अनुभव करने का एक अनूठा मंच प्रदान करता है।

विज्ञप्ति के अनुसार, यह ‘कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर’ केवल शिल्प उत्पादों के प्रदर्शन का स्थान मात्र नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि किस प्रकार कौशल विकास, मूल्य श्रृंखला की मजबूती और बाजार तक प्रभावी पहुँच के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को ठोस आर्थिक अवसरों में परिवर्तित किया जा सकता है। यह पहल स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने और उनकी कला को एक स्थायी आजीविका का साधन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

‘ताना-बाना समारोह’ परंपरागत रूप से हर साल दिवाली से पहले चांपा में आयोजित किया जाता रहा है। यह आयोजन बुनकरों और कारीगर समुदायों के अमूल्य योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। इस वर्ष, इस प्रतिष्ठित समारोह को पहली बार रायपुर में आयोजित किया गया, जिससे इसे व्यापक पहचान मिली। कार्यक्रम में हिंडाल्को के वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से सौरभ खेडेकर (निदेशक, कोसाला एवं सीईओ, स्पेशियलिटी एल्युमिना बिजनेस), उन्नीकृष्णन प्रभाकरन (हेड, बिजनेस फाइनेंस, केमिकल्स), संदीप पाटिल (बिजनेस हेड, मुरी) और सुखेंदु घोष (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सीएचआर स्किल डेवलपमेंट) उपस्थित रहे।

इस समारोह में राज्य रेशम विभाग, वीवर्स सर्विस सेंटर और राष्ट्रीय हैंडलूम विकास निगम (NHDC) के प्रतिनिधियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, जो इस पहल के महत्व को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान, डॉ. संगीता कापसे की संगीता कला अकादमी की छात्राओं राधिका शर्मा और गीतिका चक्रधर ने लखनऊ घराना शैली में एक मनमोहक कथक प्रस्तुति दी, जिसने सांस्कृतिक माहौल को और भी समृद्ध किया।

कोसाला लाइवलीहुड एंड सोशल फाउंडेशन एक सेक्शन 8 कंपनी है, जिसे वर्ष 2021 में हिंडाल्को की सामाजिक विकास पहल के रूप में स्थापित किया गया था। कंपनी का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में कोसा की रीलिंग और बुनाई की पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करना है। अपनी स्थापना के बाद से, कोसाला ने क्षमता निर्माण, तकनीकी प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर प्रदान करके जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और कोरबा जिलों के 18 गाँवों में 1, 100 से अधिक कारीगरों और समुदाय के सदस्यों तक अपनी पहुँच बनाई है। ये आंकड़े कंपनी द्वारा दिए गए हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।

‘क्राफ्टिंग स्किल्स, क्रिएटिंग लाइवलीहुड्स’ पहल के तहत, देवरी गाँव की 30 महिलाएँ वर्तमान में हाथ की कढ़ाई का एक अल्पकालिक प्रशिक्षण ले रही हैं। कंपनी के अनुसार, इस प्रशिक्षण का प्राथमिक उद्देश्य इन महिलाओं को व्यावहारिक शिल्प कौशल प्रदान करना है, जिससे उनके लिए आजीविका के अतिरिक्त और स्थायी अवसर सृजित हो सकें। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है।

इसी क्रम में, करमंदा गाँव में ‘करघाग्राम बुनाई, सीखने और आजीविका का केंद्र’ के माध्यम से महिलाओं को कोसा बुनाई सिखाई जा रही है। स्थानीय ग्राम पंचायत और सरपंच के सक्रिय सहयोग से शुरू की गई इस पहल में कुल 20 महिलाएँ जुड़ी हैं, जिनमें से 10 महिलाएँ अर्ध-कुशल हैं और 10 महिलाएँ पहली बार बुनाई सीख रही हैं। यह केंद्र स्थानीय समुदाय के सहयोग से पारंपरिक शिल्प को जीवित रखने और नई पीढ़ी को कौशल हस्तांतरित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

सौरभ खेडेकर ने इस अवसर पर कहा कि पारंपरिक शिल्प का संरक्षण और सतत आजीविका के अवसरों का सृजन समावेशी विकास के महत्वपूर्ण आयाम हैं। उनके अनुसार, कोसाला के माध्यम से कंपनी कोसा की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के साथ-साथ समुदायों को नए कौशल सीखने और स्थायी आजीविका विकसित करने के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके।

कोसाला लाइवलीहुड एंड सोशल फाउंडेशन की सीईओ नीता शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक शिल्प का संरक्षण और सतत आजीविका का सृजन साथ-साथ चलना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि लोगों को उचित प्रशिक्षण, उपयुक्त सहयोग और बाजार के अवसर मिलें, तो उनकी कला एक सशक्त आजीविका का माध्यम बन सकती है। कंपनी का यह प्रयास है कि कोसा बुनाई को केवल एक सांस्कृतिक विरासत के रूप में ही नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक व्यावहारिक रोजगार के साधन के रूप में भी स्थापित किया जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!