छत्तीसगढ़

पत्नी की पवित्रता पर शक में ढाई साल के बेटे की हत्या, हाई कोर्ट ने कहा- ऐसे अपराध में नहीं मिलेगी राहत


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पत्नी की पवित्रता और बच्चे की वैधता पर संदेह के चलते अपने ही ढाई वर्षीय बेटे की हत्या के दोषी पिता को हाई कोर्ट से राहत नहीं …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 10:21:19 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 10:22:43 AM (IST)

पत्नी की पवित्रता पर शक में ढाई साल के बेटे की हत्या, हाई कोर्ट ने कहा- ऐसे अपराध में नहीं मिलेगी राहत
दुर्ग के योगेश टंडन की जमानत याचिका बिलासपुर हाई कोर्ट से खारिज (फाइल फोटो)

HighLights

  1. दुर्ग के योगेश टंडन की सजा निलंबन याचिका बिलासपुर हाई कोर्ट से नामंजूर
  2. पिता ने पत्नी की पवित्रता पर शक में ढाई साल के बेटे की हत्या कर दी थी
  3. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा- अपराध बेहद गंभीर, राहत नहीं

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पत्नी की पवित्रता और बच्चे की वैधता पर संदेह के चलते अपने ही ढाई वर्षीय बेटे की हत्या के दोषी पिता को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे योगेश टंडन की सजा निलंबन और जमानत याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इस स्तर पर न तो सजा निलंबित की जा सकती है और न ही जमानत दी जा सकती है।

मामले के अनुसार मृतक ढाई वर्षीय बच्चा आरोपित का पुत्र था। आरोपित को संदेह था कि बच्चा उसका जैविक पुत्र नहीं है और वह पत्नी के चरित्र पर भी शंका करता था। इसी वजह से पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। 27 जुलाई 2022 को दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसके बाद पत्नी मायके चली गई। उस समय मृतक बच्चा और अन्य तीन बच्चे आरोपित की देखरेख में ही घर पर थे। बाद में बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

जांच के बाद पुलिस ने आरोपित के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया। सुनवाई के बाद दुर्ग के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 10 अप्रैल 2024 को आरोपित को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए आरोपित ने हाई कोर्ट में सजा निलंबन और जमानत की मांग की थी।

बचाव पक्ष ने रखा यह तर्क

आरोपी की ओर से अधिवक्ता बी.के. चक्रवर्ती ने कहा कि याचिकाकर्ता को झूठा फंसाया गया है। मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य नहीं है और पूरा अभियोजन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। उन्होंने दलील दी कि आरोपित 28 जुलाई 2022 से जेल में है तथा अपील की अंतिम सुनवाई निकट भविष्य में संभव नहीं है, इसलिए सजा निलंबित कर जमानत दी जानी चाहिए।

राज्य सरकार ने किया कड़ा विरोध

राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रियांक राठी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपित ने अपने ही ढाई वर्षीय बेटे की गला घोंटकर हत्या की है। मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट रूप से मृत्यु का कारण गला घोंटना बताती है। घटना के समय बच्चा आरोपित की अभिरक्षा में था, इसलिए अप्राकृतिक मृत्यु की परिस्थितियों का स्पष्टीकरण देने का दायित्व भी उसी पर था।

कोर्ट बोला- राहत का मामला नहीं बनता

डिवीजन बेंच ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट हत्या की पुष्टि करती है। साथ ही आरोपित घटना के समय मृतक और अन्य बच्चों के साथ घर में मौजूद था, लेकिन वह बच्चे की मौत के कारणों को संतोषजनक ढंग से स्पष्ट नहीं कर सका। ऐसे में सजा निलंबन और जमानत देने का कोई मामला नहीं बनता।

यह भी पढ़ें- गैस पीड़ितों के इलाज की पूरी राशि बिना किसी सीमा के जारी करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट निगरानी समिति

कोर्ट ने आरोपित के अधिवक्ता से पूछा कि क्या वे अपील पर अंतिम बहस के लिए तैयार हैं। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि फिलहाल वे अंतिम सुनवाई के लिए तैयार नहीं हैं और पहले सजा निलंबन आवेदन पर निर्णय लिया जाए। इसके बाद अदालत ने आवेदन खारिज कर दिया।



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!