छत्तीसगढ़

‘मौत के कारखाने’ बनते उद्योग, लापरवाही से हर महीने 10 तक मजदूर गंवा रहे जान, आंकड़े बयां कर रहे भयावह सच्चाई



हर बार की तरह इस बार भी तस्वीर वही है कि प्रबंधन की लापरवाही, सुरक्षा मानकों से समझौता और घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश। दूसरी ओर शासन-प्रशासन अपनी ओर से प्रयास कर रहे, उसके बाद भी लापरवाही जारी है। हकीकत यह है कि उद्योग मालिक मुनाफा बढ़ाने के लिए सबसे पहले श्रमिकों की सुरक्षा पर ही कटौती करते हैं। हेलमेट, ग्लब्स, फायर सेफ्टी, मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे जरूरी इंतजाम या तो होते ही नहीं या सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं। नतीजा यह कि हर महीने प्रदेश मेें औसतन 8 से 10 मजदूर हादसों का शिकार हो रहे हैं।



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