छत्तीसगढ़

मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ बिलासपुर में हुंकार; कानूनी सहायता और पुनर्वास को लेकर बनी रणनीति


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं की रोकथाम, पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से स्वयंसेवी संगठन की ओर से एक दिवसीय चर्चा-परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में शासन, प्रशासन, सामाजिक संगठनों, युवाओं और विधि के विद्यार्थियों की भागीदारी रही। चर्चा के दौरान मानव तस्करी की पहचान, रोकथाम, पीड़ितों तक सहायता पहुंचाने और समाज की भूमिका पर विस्तार से विचार साझा किए गए।

मंगला स्थित होटल में आयोजि परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि समय पर सूचना, स्थानीय स्तर पर रोजगार, जागरूकता और प्रशासनिक समन्वय से ऐसे मामलों को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में बंधुआ मजदूरी से मुक्त हुए लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

साथ ही पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, पलायन पंजी का संधारण करने, बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने और गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई गई। आयोजन में 35 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए और सभी ने मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।

पीड़ितों को कानूनी अधिकार और निःशुल्क सहायता उपलब्ध

मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार चौहान ने कहा कि मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के शिकार लोगों को कानून और संविधान के तहत कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे मामलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है ताकि पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि समाज यदि समय पर जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाए तो कार्रवाई और पुनर्वास दोनों तेज हो सकते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि रोजगार के लिए बाहर जाने से पहले पूरी जानकारी लें और स्थानीय रोजगार के अवसरों पर भी ध्यान दें। जागरूकता और सतर्कता से श्रमिकों को शोषण और बंधुआ मजदूरी जैसी स्थितियों से बचाया जा सकता है।

संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत सूचना देने की अपील

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डीएसपी डीआर टंडन ने कहा कि मानव तस्करी केवल पुलिस या कानून व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि बाल श्रम, जबरन मजदूरी या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और प्रशासन तक पहुंचाएं। श्रम विभाग की ओर से लेबर इंस्पेक्टर विमल कुमार मिश्रा ने बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, श्रमिकों के अधिकार और शासन की पुनर्वास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुक्त कराए गए श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास किया जाता है और इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जरूरी है।

पंचायत और युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगी रोकथाम

शिखर युवा मंच के डायरेक्टर भूपेश वैष्णव ने कहा कि मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी जैसी समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, पंचायत, युवा और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन मंच के सचिव धनंजय अनुपान ने किया। उन्होंने कहा कि परिचर्चा का उद्देश्य विभिन्न विभागों और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग का मजबूत तंत्र तैयार करना है। चर्चा के दौरान पंचायत स्तर पर पलायन पंजी का नियमित संधारण, गांवों में जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग, बच्चों की शिक्षा और ग्राम स्तरीय विजिलेंस कमेटियों को सक्रिय करने जैसे सुझाव सामने आए। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से जागरूक समाज निर्माण का संकल्प लिया।



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