छत्तीसगढ़

बिलासपुर जिले के 99,906 किसानों को 23वीं किस्त में मिलेंगे 19.98 करोड़ रुपये


प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 20 जून को बिलासपुर जिले के 99,906 किसानों के खातों में 23वीं किस्त के रूप में कुल ₹19.98 करोड़ डीबीटी के ज …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 01:29:36 PM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 01:29:36 PM (IST)

बिलासपुर जिले के 99,906 किसानों को 23वीं किस्त में मिलेंगे 19.98 करोड़ रुपये

HighLights

  1. कृषि विज्ञान केंद्र सरकंडा में होगा पीएम मोदी का लाइव प्रसारण
  2. खरीफ फसलों के लिए खाद-बीज खरीदने में मिलेगी मदद
  3. सम्मान निधि की 23वीं किस्त के लिए आधार और ई-केवाईसी जरूरी

बिलासपुर. 20 जून को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों के खातों में 23वीं किस्त की राशि ट्रांसफर की जाएगी। खरीफ सीजन की शुरुआत में मिलने वाली यह आर्थिक सहायता बिलासपुर जिले के 99 हजार 906 किसान परिवारों के लिए बेहद मददगार साबित होगी, जिसके तहत जिले में कुल 19.98 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से पहुंचेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से दोपहर 3.45 बजे देश भर के किसानों के खातों में सीधे राशि हस्तांतरित करेंगे। बिलासपुर जिले के किसानों को योजना के जरिए खरीफ फसलों के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था करने में बड़ा संबल मिलेगा। योजना के तहत पात्र कृषकों को सालाना 6 हजार रुपये की सहायता 2-2 हजार की तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में दी जाती है। इससे पूर्व मार्च 2026 में 22वीं किस्त जारी की गई थी।

प्रधानमंत्री के मुख्य संबोधन के लाइव प्रसारण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, सरकंडा में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जहां जिले के किसान सीधे जुड़ सकेंगे। कृषि विभाग ने जिले के सभी लाभार्थी किसानों से विशेष अपील की है कि वे राशि हस्तांतरण में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या से बचने के लिए अपने बैंक खातों की जानकारी तत्काल अपडेट करा लें। किसानों को अपनी ई-केवाईसी, आधार सत्यापन और एग्रीस्टैक फार्मर्स आईडी को समय रहते दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किस्त सुचारू रूप से उनके खातों में जमा हो सके।

खेती की शुरुआत में मिलेगी बड़ी राहत

मानसून पूर्व की तैयारियों के बीच मिलने वाली यह राशि किसानों के लिए संजीवनी का काम करेगी। खेती-किसानी की शुरुआत में बीज और उर्वरक की व्यवस्था के लिए किसानों को साहूकारों या कर्ज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रत्येक चार माह में मिलने वाली यह राशि सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है।



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