छत्तीसगढ़

माचकोट परिक्षेत्र में मिले बाघ के पगचिन्ह, वन विभाग की टीम कर रही पीछा


जगदलपुर के समीप माचकोट वन परिक्षेत्र में बाघ या तेंदुए की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। कुरंदी और चेरबहार क्षेत्र में पगचिन्ह मिलने और गाय का शिकार होने …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 09 Jul 2026 03:48:00 PM (IST)Updated Date: Thu, 09 Jul 2026 03:53:13 PM (IST)

CG Tiger Pugmark: माचकोट परिक्षेत्र में मिले बाघ के पगचिन्ह, वन विभाग की टीम कर रही पीछा
वन्यजीव के गहरे पदचिह्न। वन विभाग

HighLights

  1. माचकोट परिक्षेत्र में मिले बाघ के पगचिन्ह
  2. वन विभाग की टीम ने बढ़ाई निगरानी
  3. ग्रामीण इलाकों में भयभीत ग्रामीण

नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। शहर के समीप माचकोट वन परिक्षेत्र के कुरंदी जंगल में बाघ के पगचिन्ह मिलने से ग्रामीणोें में दहशत का माहौल है। तीन-चार जुलाई से लगातार इस वन परिक्षेत्र के अलग-अलग क्षेत्रोें में पगचिन्ह देखे जा रहे हैं। खेती-किसानी के समय किसान खेतों की ओर जाने से डर रहे हैं। वन विभाग ने वनकर्मियों की कुछ टीमें गठित की है जो पगचिन्ह के आधार पर बाघ का पीछा कर रहे हैं।

तीन-चार जुलाई को चेरबहार के कुरलूभाटा में खेत में एक गाय का क्षत विक्षत शव मिला था। आशंका जताई जा रही है कि इसका शिकार बाघ नेे किया होगा। वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने पर बताया गया कि प्रारंभिक सर्वेक्षण और पगचिन्ह के आधार पर बाघ अथवा तेंदुआ के होने का अनुमान है।

पूर्व में ओडिशा और उत्तर में कांगेर घाटी

माचकोट वन परिक्षेत्र पूर्व दिशा में ओडिशा सीमा तक और उत्तर में कांगेर घाटी राष्टीय उद्यान तक विस्तारित है। जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर नेतानार के आगे कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्र शुरू हो जाता है। यह पूरा इलाका सघन वन क्षेत्र है। यहांं वन्यजीव मिलते हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी माचकोेट परिक्षेत्र प्रकाश देहारी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि पगचिन्ह मिले हैं। पगचिन्ह की तस्वीरें लेकर जांच के लिए भेजी जाएगी। जंगली इलाका होने से वन्यजीव विचरण करते रहते हैं। बाघ के पगचिन्ह हैं या तेंदुआ के जांच और परीक्षण के बाद स्पष्ट हो पाएगा। आसपास के गांवों में जानकारी दे दी गई है और शिकार नहीं करने को कहा गया है। अभी तक किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है।

छह माह पहले भी मिले थे पगचिन्ह

छह माह पहले भी शहर के आसपास तोकापाल, बास्तानार और बस्तर विकासखंड के वन क्षेत्र में इसी तरह के पगचिन्ह देखे गए थे। कुछ दिनों बाद पगचिन्ह मिलने बंद हो गए तो मान लिया गया था कि वन्यजीव बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व की ओर निकल गया होगा। छह माह बाद दोबारा शहर के समीप माचकोट परिक्षेत्र में पगचिन्ह मिलने से बाघ अथवा तेंदुअा की उपस्थिति इसी इलाके में मानी जा रही है।



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