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कोयला लेवी मामले में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, भिलाई में सूर्यकांत तिवारी के करीबी मनीष उपाध्याय का मकान सील

भिलाई में कोयला लेवी मामले से जुड़ी संपत्ति पर आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति प्रभाग रायपुर की टीम ने सोमवार को सूर्यकांत तिवारी के करीबी माने जाने वाले मनीष उपाध्याय के भिलाई स्थित मकान को अपने कब्जे में लेकर मकान को सील कर दिया है। कोहका की सूर्या रेसीडेंसी स्थित मकान नंबर A-1 पर विभाग की टीम ने बेनामी संपत्ति कानून के तहत कार्रवाई की। सुपेला पुलिस की मौजूदगी में यह कार्रवाई सोमवार को देर शाम तक चली। इस दौरान आईटी की टीम ने ढोल बजाकर मुनादी करवाई।

आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति प्रभाग के अधिकारी रुद्र कुमार चंद्राकर की ओर से सुपेला थाना प्रभारी को पत्र भेजकर कार्रवाई के दौरान पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। इसके बाद सोमवार को आयकर विभाग के अधिकारी पुलिस बल के साथ कोहका स्थित सूर्या रेसीडेंसी पहुंचे। बताया जा रहा है कि यह मकान सूर्यकांत तिवारी के नाम पर है, जिसे सूर्यकांत तिवारी ने मनीष उपाध्याय को दिया था। मकान को पहले ही जांच में चिन्हित किया गया था।

कार्रवाई के दौरान टीम ने सूर्या रेसीडेंसी के मकान नंबर A-1 पर कुर्की की कार्रवाई की। रिकॉर्ड के अनुसार यह संपत्ति खसरा नंबर 2028/38 पर स्थित है और इसका क्षेत्रफल 0.02 हेक्टेयर बताया गया है। आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति यूनिट ने जांच के दौरान इस संपत्ति को बेनामी संपत्ति के रूप में चिन्हित किया था। अब विभाग ने आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत इसका भौतिक कब्जा अपने हाथ में लिया है। कोयला लेवी मामले में पहले से जांच और अदालतों में चल रही कार्यवाही के बीच भिलाई की इस संपत्ति पर आयकर विभाग की कार्रवाई को मामले से जुड़ी संपत्तियों पर चल रही कार्रवाई की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला? जानिए 3 प्वाइंट्स में

1. आईटी रेड से शुरू हुई थी जांच: जून-जुलाई 2022 में आयकर विभाग ने सूर्यकांत तिवारी और उनके पूरे सिंडिकेट के ठिकानों पर समानांतर छापेमारी की थी। इस दौरान भारी मात्रा में नकदी, बेनामी निवेश के दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले थे। इसी जांच के आधार पर बाद में ईडी और राज्य की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू/एसीबी ने आपराधिक मामला दर्ज किया था।

2. सिंडिकेट में मनीष की क्या थी भूमिका: जांच एजेंसियों के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी द्वारा कोयला परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली (लेवी) के लिए बनाए गए नेटवर्क में मनीष उपाध्याय (निवासी- सूर्या रेसीडेंसी, कोहका भिलाई) मुख्य कलेक्शन और कॉर्डिनेशन का काम संभालता था। ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों ही अपनी चार्जशीट में उसे आरोपी बना चुकी हैं।

3. बेनामी अधिनियम के तहत जब्ती: अवैध लेवी और काली कमाई से अर्जित संपत्तियों की जांच के दौरान आईटी की बेनामी यूनिट ने मनीष उपाध्याय की इस अचल संपत्ति को चिन्हित कर पहले जब्त किया था। अब आयकर विभाग ने ‘बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम, 1988’ की धारा 29(2)(b) के तहत इस संपत्ति का पूर्ण कानूनी नियंत्रण और कब्जा अपने हाथ में ले लिया है।

सूर्यकांत तिवारी का करीबी बताया जाता है मनीष उपाध्याय: मनीष उपाध्याय का नाम कोयला लेवी मामले की जांच में पहले से सामने आता रहा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में जांच एजेंसियों के हवाले से कहा गया है कि मनीष उपाध्याय सूर्यकांत तिवारी का करीबी था और कोयला परिवहन से कथित तौर पर वसूली गई रकम को आगे पहुंचाने में उसकी भूमिका बताई गई थी। 2022 की आयकर कार्रवाई के बाद सामने आया था नेटवर्क।

कोयला लेवी मामले की जांच की शुरुआत आयकर विभाग की जून 2022 में हुई तलाशी कार्रवाई के बाद हुई थी। जांच के दौरान दस्तावेज और अन्य सामग्री मिलने के बाद इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच भी आगे बढ़ी। जांच एजेंसियों के अनुसार, कोयला परिवहन से प्रति टन 25 रुपए की कथित अवैध वसूली का नेटवर्क बनाया गया था। इस मामले में कई लोगों की भूमिका की जांच की गई। न्यायिक रिकॉर्ड में भी 25 रुपए प्रति टन की कथित वसूली और इससे जुड़े नेटवर्क का उल्लेख है।

इसी मकान में रहता था मनीष उपाध्याय, सूर्यकांत ने करवाया था उपलब्ध: न्यायिक रिकॉर्ड में जांच एजेंसियों के हवाले से कहा गया है कि सूर्या रेसीडेंसी स्थित A-1 मकान मनीष उपाध्याय के नाम से जुड़ा था, लेकिन जांच में इसे सूर्यकांत तिवारी से संबंधित बेनामी संपत्ति बताया गया। रिकॉर्ड में यह भी उल्लेख है कि मनीष उपाध्याय इसी मकान में रहता था और संपत्ति को सूर्यकांत तिवारी द्वारा उपलब्ध कराए जाने का जांच एजेंसियों ने दावा किया था। इसके अलावा जांच के दौरान जब्त डायरी में मनीष उपाध्याय के नाम से जुड़े कोड और रकम की एंट्री मिलने का भी न्यायिक रिकॉर्ड में उल्लेख है। आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति यूनिट ने अब इसी संपत्ति पर आगे की कार्रवाई करते हुए मकान का भौतिक कब्जा ले लिया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा। विभाग की ओर से बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की गई है।

A-22 पर भी बेनामी संपत्ति का नोटिस चस्पा: आयकर विभाग के बेनामी संपत्ति प्रभाग (BPU) ने भिलाई के कोहका स्थित सूर्या रेसीडेंसी परिसर के मकान नंबर A-22 पर भी कानूनी शिकंजा कस दिया है। आईटी टीम ने इस मकान पर बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत जब्ती का आधिकारिक नोटिस चस्पा किया हुआ है। जानकारी के अनुसार यह मकान पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और उनके परिजनों के नाम से जुड़ा हुआ पाया गया था। सिंडिकेट के जरिए अवैध कोयला लेवी से जुटाई गई काली कमाई का लेन-देन और तालमेल बैठाने के लिए इस परिसर का उपयोग किया जाता था।

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