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कस्टम मिलिंग घोटाले में ईडी ने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के दस्तावेजों की जांच शुरू की, राज्य सरकार ने सौंपे 350 पेज

छत्तीसगढ़ के कथित कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच में ईडी ने अब प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के फैसले से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने एजेंसी को करीब 350 पेज के दस्तावेज सौंपे हैं। इन दस्तावेजों में नोटशीट, बैठकों के रिकॉर्ड, पत्राचार और राइस मिलर्स एसोसिएशन की ओर से दिए गए आवेदन शामिल हैं।

ईडी के मुताबिक खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में कस्टम मिलिंग का प्रोत्साहन 40 रुपए से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल किया गया था। एजेंसी की जांच के अनुसार, इस राशि की दो किस्तों में मिलर्स से 20-20 रुपए प्रति क्विंटल की कथित अवैध वसूली की गई। ईडी ने बताया है कि मिलर्स के बिलों का भुगतान रोककर कथित तौर पर वसूली के लिए दबाव बनाया जाता था।

ईडी की जांच में तत्कालीन मार्कफेड एमडी मनोज सोनी और छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन से कथित वसूली की जानकारी जिला विपणन अधिकारियों तक पहुंचती थी और भुगतान के लिए बिलों का मिलान किया जाता था। ईडी ने 2024 में दोनों को गिरफ्तार किया था और बाद में मामले में अभियोजन शिकायत भी पेश की। विशेष अदालत ने इस पर संज्ञान लिया था।

एजेंसी के अनुसार, प्रोत्साहन राशि बढ़ने के बाद कथित किकबैक से 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई गई थी। अब राज्य सरकार से मिले दस्तावेजों के जरिए ईडी यह जांच रही है कि 40 से 120 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और इसकी प्रक्रिया में कौन-कौन से अधिकारी व संस्थाएं शामिल थीं। मामले में आगे की जांच जारी है।

घोटाले का राज कैसे खुला, इस पर ईडी को 2023 में शिकायत मिली थी कि छत्तीसगढ़ में बड़ी तादाद में कस्टम मिलिंग घोटाला हुआ है। इसके बाद अक्टूबर 2023 में ईडी की टीम ने मार्कफेड के तत्कालीन एमडी मनोज सोनी के खुशी वाटिका स्थित घर और प्रदेश के कुछ राइस मिलर्स के ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान 2 दिन की जांच के बाद ईडी के अफसरों ने खुलासा किया कि मनोज सोनी ने करोड़ों की रिश्वत ली है। मार्कफेड के अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के राइस मिलर्स को कस्टम मिलिंग का भुगतान करने के नाम पर 140 करोड़ से ज्यादा की वसूली की है।

ईडी के खुलासे के बाद ईओडब्ल्यू ने कस्टम मिलिंग घोटाले में 29 जनवरी 2024 को पहली एफआईआर दर्ज की। इसमें रोशन चंद्राकर, प्रीतिका, रिटायर सीनियर आईएएस अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया, रामगोपाल अग्रवाल के नाम शामिल हैं। ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि कस्टम मिलिंग राशि मिलर्स को देने के नाम पर यह वसूली की गई है। 2020-21 से पहले कस्टम मिलिंग के बदले मिलर्स को प्रति क्विंटल 40 रुपए भुगतान किया जाता था। मिलर्स की मांग पर कांग्रेस सरकार ने इस राशि को 3 गुना बढ़ाया।

इसके बाद मिलर्स को मार्कफेड से 40 रुपए की जगह 120 रुपए भुगतान किया जाने लगा। राशि बढ़ने पर मार्कफेड के अधिकारियों ने प्रति क्विंटल 20 रुपए ‘कट’ लेना शुरू किया, जो मिलर्स ‘कट’ देते थे, उसका भुगतान कर दिया जाता था, जो कट नहीं देते थे, उनका पैसा रोक दिया जाता था। इस पैटर्न पर मार्कफेड के अधिकारियों ने प्रदेश के 2700 मिलर्स से 140 करोड़ से ज्यादा की उगाही कर ली। कस्टम मिलिंग, डीओ काटने, मोटा धान को पतला, पतले धान को मोटा करने, एफसीआई को नान में कंवर्ट करने का पैसा लिया जाता था। मनोज सोनी और उनके सहयोगियों का खेल 2 साल से चल रहा था। इस खेल में मार्कफेड के अफसर और छत्तीसगढ़ स्टेट इन मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी भी शामिल थे।

जिन राइस मिलर्स ने रिश्वत दी, उन्हें फौरन भुगतान कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने कमीशन वसूली का जिम्मा राइस मिलर्स को दिया था। वसूली का पैसा सीधे उनके पास आता था। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन ने एमडी मनोज सोनी के साथ मिलकर प्रति क्विंटल 20 रुपए रिश्वत ली है। यह मार्कफेड के जिला अधिकारी को दी गई, जो उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई। जिन राइस मिलर्स ने रिश्वत दी थी, एमडी ने तुरंत उनके बिलों का भुगतान कर दिया था।

ईओडब्ल्यू ने खुलासा किया था कि कमीशन के पैसे से सोनी और रोशन का परिवार कई बार टूर पर गया। इसमें कश्मीर टूर भी शामिल था। टिकट से ठहरने तक की व्यवस्था रोशन ने की थी। दोनों ने कई जगह प्रॉपर्टी में निवेश किया है। ईओडब्ल्यू को प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी मिले हैं। वसूली से मनोज ने 15.44 करोड़ की अवैध आय अर्जित की है।

6 मार्च 2023 को विधानसभा में बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने कस्टम मिलिंग में प्रति टन 20 रुपए वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जो मिलर्स वसूली देते है, उनको ही भुगतान होता है। इसके बाद तत्कालीन मंत्री मोहम्मद अकबर ने सबूत मांगा था और सदन में जमकर हंगामा हुआ था।

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