छत्तीसगढ़

हसदेव में 7 लाख पेड़ों की कटाई का खतरा:भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने केंद्र की समिति को लिखा पत्र, बोले- खनन मंजूरी रोकी जाए




छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केंटे एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सलाहकार समिति को पत्र लिखकर 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की है। इस प्रस्ताव पर 8 मई 2026 को नई दिल्ली में समिति की बैठक में चर्चा होनी है। देवेंद्र यादव ने अपने पत्र में कहा है कि हसदेव अरण्य सिर्फ कोयले का क्षेत्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान है। यहां प्रस्तावित खनन परियोजना के कारण करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई का खतरा है। इससे पूरे इलाके का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हसदेव को बचाने के लिए राजनीति से ऊपर उठकर फैसला लेने की जरूरत है। 98 प्रतिशत हिस्सा घना जंगल क्षेत्र
विधायक ने बताया कि प्रस्तावित कोल ब्लॉक का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा घने जंगल क्षेत्र में आता है। यह इलाका जैव विविधता के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। यहां हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। इसके अलावा 400 से ज्यादा वनस्पति और जीव प्रजातियां और 100 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां इस क्षेत्र में पाई जाती हैं। हाथियों के आने-जाने का रास्ता भी होगा प्रभावित
देवेंद्र यादव ने कहा कि अगर खनन शुरू होता है तो हाथियों के आने-जाने का रास्ता प्रभावित होगा। इससे मानव और वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका भी है। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि चारनोई नदी, हसदेव नदी और बांगो बांध के जलग्रहण क्षेत्र पर भी इस परियोजना का असर पड़ सकता है। इससे आसपास के गांवों में पानी और खेती से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। आदिवासी समाज की आजीविका पर पड़ेगा असर
विधायक ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में 26 जुलाई 2022 को पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव का भी जिक्र किया, जिसमें हसदेव अरण्य क्षेत्र में आगे खनन नहीं किए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता और जनप्रतिनिधियों की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। देवेंद्र यादव ने यह भी कहा कि इस परियोजना से स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने सलाहकार समिति से मांग की है कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए 8 मई की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी न दी जाए।



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