छत्तीसगढ़

धमतरी में चंगाई सभा को लेकर हंगामा, हिंदू संगठनों ने लगाया मतांतरण का आरोप

धमतरी शहर के टिकरापारा वार्ड में रविवार को एक निजी परिसर में आयोजित चंगाई सभा को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। हिंदू जागरण मंच और सर्व हिंदू समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सभा की आड़ में गैर-ईसाइयों का अवैध मतांतरण कराने का आरोप लगाया और आयोजन स्थल का घेराव कर दिया।

सुबह दस बजे शुरू हुआ यह गतिरोध दोपहर बाद करीब तीन बजे तक चला। लगभग पांच घंटे तक चले इस हंगामे के दौरान कई बार तीखी नोकझोंक हुई और धमतरी-जगदलपुर मुख्य मार्ग पर यातायात भी बाधित रहा।

विरोध की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस, एसडीएम पीयूष तिवारी, तहसीलदार कुसुम प्रधान और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने एहतियातन सभा में शामिल होने पहुंच रहे बाहरी लोगों को मकान के भीतर जाने से रोक दिया। इस दौरान मकान के भीतर मौजूद आयोजकों और बाहर प्रदर्शन कर रहे हिंदू संगठनों के बीच तीखी बहस हुई।

विवाद बढ़ता देख महापौर रामू रोहरा भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाइश देकर शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया।

विरोध के बाद हिंदू जागरण मंच ने तहसीलदार कुसुम प्रधान को अनुविभागीय अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रार्थना सभाओं की निष्पक्ष जांच, संबंधित लोगों और आयोजकों की भूमिका की जांच तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 के प्रावधानों के पालन की जांच की मांग की गई। मंच ने कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

इस दौरान हिंदू जागरण मंच के पुरुषोत्तम निषाद, चित्रेश साहू, डाकेश्वर साहू, प्रतीक सोनी, मोनू साहू, हितेश घृतलहरे सहित हिंदू जागरण मंच के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सर्व हिंदू समाज के अध्यक्ष महेश रोहरा ने कहा कि हर धर्म को अपनी धार्मिक गतिविधियां करने की आजादी है, लेकिन हिंदुओं को बहला-फुसलाकर सभा में लाना उचित नहीं है। उन्होंने हिंदुओं को मतांतरित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि शांति समिति की बैठक में तय हुआ था कि प्रार्थना सभा में केवल ईसाई समुदाय के लोग शामिल होंगे। इसके बावजूद रविवार को गैर-ईसाई भी सभा में शामिल होने पहुंचे।

हिंदू जागरण मंच के प्रांत युवा प्रमुख दीपक सिंह ठाकुर ने कहा कि शांति समिति की बैठक में कुछ शर्तों पर सहमति बनी थी। उनके अनुसार प्रार्थना सभा में केवल ईसाई समुदाय के लोगों को शामिल होना था। जिसे मत परिवर्तन करना है, वह विधिवत प्रक्रिया अपनाकर बपतिस्मा करवा सकता है। उन्होंने मतांतरण को लेकर जांच की मांग की।

बालोद जिले के ग्राम फागुनदाह से प्रार्थना सभा में शामिल होने पहुंचीं पुष्पा साहू ने कहा कि कोई धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा रहा है। यहां मन और जीवन का परिवर्तन किया गया है। यहां आने के बाद उन्हें शांति मिली है।

धमतरी जिला क्रिश्चियन फोरम के जनरल सेक्रेटरी डा. डायमंड फिलस ने कहा कि देश में संविधान सर्वोपरि है। संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। किसी व्यक्ति को यह नहीं कहा जा सकता कि वह यहां जाए या वहां न जाए। चर्च में स्पष्ट रूप से नोटिस बोर्ड लगाया गया है कि प्रार्थना सभा मसीहियों के लिए है। इसके बावजूद कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से सभा में शामिल होना चाहता है तो उसे रोका नहीं जा सकता। किसी को सभा में बुलाया नहीं जाता और न ही किसी पर दबाव बनाया जाता है। जो लोग आते हैं, वे अपनी इच्छा से आते हैं। यह उनका संवैधानिक अधिकार है।

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