छत्तीसगढ़

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघिन की वापसी, VIDEO:कैमरा ट्रैप में कैद, 15 साल बाद लौटी स्थायी उपस्थिति की उम्मीद




छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यहां लगाए गए कैमरा ट्रैप में एक बाघिन की नियमित उपस्थिति दर्ज की गई है। वन विभाग का मानना है कि यह बाघिन प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए उदंती-सीतानदी के वनों में पहुंची है और अब इसे अपना स्थायी ठिकाना बना रही है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को वर्ष 2009 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। हालांकि, पिछले एक दशक से यहां बाघों की स्थायी उपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी। रिजर्व में अंतिम बार बाघ की पुष्टि 2019-20 में हुई थी, लेकिन वह भी केवल आवागमन तक सीमित रही थी। ऐसे में इस बाघिन की तस्वीरें रिजर्व में बाघों की वापसी और प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल का संकेत दे रही हैं। वन विभाग ने रिजर्व के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले कैमरा ट्रैप लगाए थे। पिछले एक माह से अलग-अलग स्थानों पर मिली तस्वीरों और वीडियो से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह एक ही बाघिन है जो नियमित रूप से क्षेत्र में घूम रही है। उसकी गतिविधियां, शारीरिक हाव-भाव और क्षेत्र चिह्नित करने के तरीके से स्पष्ट है कि वह यहां स्थायी रूप से बसने की प्रक्रिया में है। इस सफलता को अभ्यारण्य में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान से भी जोड़ा जा रहा है। पिछले दो वर्षों में, 13 से अधिक स्थानों से 950 हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमण हटाया गया है। इस अभियान को वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जिससे बाघिन जैसे वन्यजीवों को सुरक्षित विचरण के लिए जगह मिली है। इन प्रयासों से बदली तस्वीर पिछले पांच वर्षों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में बाघों की वापसी के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इसके तहत वन विभाग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। सुरक्षा बढ़ाई गई: शिकार रोकने के लिए एंटी-पोचिंग कैंप बढ़ाए गए, नियमित गश्त शुरू की गई और ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था की गई। पानी की व्यवस्था की गई: वन्यजीवों के लिए 250 से अधिक कृत्रिम जल स्रोत और झिरियों का निर्माण किया गया। जंगल का सुधार किया गया: खराब हो चुके 400 हेक्टेयर वन क्षेत्र को फिर से विकसित किया गया और घास के मैदान तैयार किए गए। अतिक्रमण हटाया गया: कोर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर 1200 हेक्टेयर वन भूमि को मुक्त कराया गया। वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने पर काम हुआ: चीतल, सांभर और गौर जैसे जानवरों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं चलाई गईं। विभाग का मानना है कि बाघिन की आमद इन्हीं प्रयासों की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। क्या कहते हैं आंकड़े 2014 की गणना में USTR में बाघों की संख्या शून्य थी। 2018 की रिपोर्ट में 1 बाघ का मूवमेंट दर्ज हुआ था। 2022 में NTCA की रिपोर्ट में भी यहां स्थायी बाघ नहीं पाए गए थे। ऐसे में इस बाघिन की उपस्थिति रिजर्व के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ मानी जा रही है। अब आगे क्या वन विभाग ने बाघिन की सुरक्षा के लिए ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ गठित की है। पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और स्थानीय ग्रामीणों को भी निगरानी में शामिल किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य अगले 2 साल में उदंती-सीतानदी को ‘ब्रीडिंग पॉपुलेशन’ वाला रिजर्व बनाना है ताकि मध्य भारत के कान्हा-पेंच-अचानकमार कॉरिडोर से और बाघ यहां आ सकें। वन विभाग का आधिकारिक बयान इस बाघिन की उपस्थिति केवल एक वन्यजीव की कहानी नहीं है, बल्कि यह आशा, पुनर्जीवन और प्रकृति की सकारात्मक प्रतिक्रिया का संदेश है। यह दर्शाता है कि उदंती-सीतानदी में किए गए संरक्षण प्रयास रंग ला रहे हैं। हमारा संकल्प है कि USTR को फिर से मध्य भारत के प्रमुख बाघ परिदृश्यों में गौरवपूर्ण स्थान दिलाएं। बाघिन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. राकेश वर्मा कहते हैं, बाघिन का किसी नए क्षेत्र को चुनना बहुत बड़ा संकेत है। मादा बाघ तभी क्षेत्र स्थापित करती है जब उसे भोजन, पानी और सुरक्षा का भरोसा हो। अगर अगले 6 महीने में यह यहां टिकी रही, तो नर बाघ का आना भी तय है। स्थानीय लोगों में खुशी
सीतानदी क्षेत्र के गांव कुहकुहा के सरपंच मनोहर नेताम ने कहा, “हमारे जंगल में बाघिन आई है, यह गर्व की बात है। हम वन विभाग के साथ मिलकर उसकी रक्षा करेंगे। इससे ईको-टूरिज्म बढ़ेगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा।”



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!