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छत्तीसगढ़ में मतांतरण बना बड़ा मुद्दा, 58 साल बाद बदलाव की तैयारी; 17 जिलों में तनाव के बाद सरकार लाई कानून


CG Conversion Law: छत्तीसगढ़ में मतांतरण का मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 20 Mar 2026 11:37:10 AM (IST)Updated Date: Fri, 20 Mar 2026 11:51:22 AM (IST)

छत्तीसगढ़ में मतांतरण बना बड़ा मुद्दा, 58 साल बाद बदलाव की तैयारी; 17 जिलों में तनाव के बाद सरकार लाई कानून
मतांतरण विवादों के बीच छत्तीसगढ़ में नया कानून बना निर्णायक मोड़ (AI Generated Image)

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ के 17 जिलों में मतांतरण को लेकर तनाव
  2. प्रदेशभर में पिछले एक साल में 96 मामले दर्ज हुए
  3. बिलासपुर और धमतरी जिले बने सबसे बड़े हॉटस्पॉट

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतांतरण का मुद्दा अब केवल धार्मिक विषय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। गांवों से लेकर शहरों तक बढ़ते विवादों के बीच विष्णु देव साय सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को विधानसभा से पारित कराया है।

17 जिलों में बढ़ा तनाव, 96 मामले दर्ज

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश के 33 में से 17 जिलों में मतांतरण को लेकर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। पिछले एक साल में ही 96 मामले दर्ज किए गए हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। सामाजिक ताने-बाने पर इसके असर को देखते हुए सरकार ने कानून में बदलाव जरूरी माना।

नया कानून, पुराने अधिनियम की जगह

नया विधेयक वर्ष 1968 के पुराने अधिनियम का स्थान लेगा, जिसमें सजा की अवधि महज एक साल और जुर्माना 5,000 रुपये तक सीमित था। सरकार का तर्क है कि कमजोर कानून के कारण मतांतरण कराने वाले गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी।

बिलासपुर और धमतरी बने हॉटस्पॉट

आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर जिले में पिछले एक साल में सबसे अधिक 32 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि धमतरी 29 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा रायपुर, बलरामपुर और जांजगीर-चांपा में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वर्ष 2021 से जुलाई 2025 के बीच हिंदू और ईसाई समुदायों के बीच 102 बार टकराव की स्थितियां बनीं।

अंतिम संस्कार तक पहुंचा विवाद

ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर और सरगुजा में विवाद अब अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों तक पहुंच गया है। मतांतरित लोगों के दाह संस्कार को लेकर ग्रामीणों और मिशनरियों के बीच कई शिकायतें लंबित हैं। कई जगह सामाजिक बहिष्कार और हिंसक झड़पों की घटनाएं भी सामने आई हैं।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

जनवरी 2026 में राजनांदगांव में अवैध आश्रम के जरिए नाबालिगों के मतांतरण का मामला सामने आया। वहीं फरवरी 2026 में बिलासपुर में झाड़-फूंक के नाम पर मतांतरण की कोशिशों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

CG हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जनजातीय क्षेत्रों में प्रलोभन के जरिए हो रहे मतांतरण को सामाजिक खतरा बताया है। सरकार का मानना है कि नए सख्त कानून से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।



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