ब्लैकमेलिंग का आरोप बिलासपुर कोर्ट ने किया खारिज

बिलासपुर कोर्ट ने प्रेम विवाह के बाद पारिवारिक कलह के चलते बहू पर ब्लैकमेलिंग और धमकी का झूठा आरोप लगाने वाली सास की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने क…और पढ़ें

HighLights
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस सहायता (डायल 112) मांगना कोई जुर्म नहीं है।
- रेप की शिकायत दर्ज कराने वाली महिला को ‘अपराधी’ मानना कानूनी रूप से गलत है।
- प्रेम विवाह से नाखुश परिवार द्वारा बहू को फंसाने की साजिश अदालत में नाकाम रही।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला न्यायालय ने एक युवती के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, धमकी और तोड़फोड़ का मामला दर्ज कराने की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि किसी महिला द्वारा पूर्व में दर्ज कराई गई रेप की शिकायत को उसका ””अपराधिक व्यवहार”” नहीं माना जा सकता। यह आदेश विशेष न्यायाधीश लवकेश प्रताप सिंह बघेल की अदालत ने ””दांडिक पुनरीक्षण की सुनवाई के बाद पारित किया।
मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का है, जो एक प्रेम विवाह और पारिवारिक कलह का परिणाम है। पुनरीक्षणकर्ता (मां) पुष्पा देवी रात्रे ने ट्रायल कोर्ट के 1 दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि प्रीति सूर्यवंशी नाम की युवती उनके बेटे संजय रात्रे को झूठे प्यार में फंसा रही है और आत्महत्या के लिए उकसा रही है। युवती के वकील समीर शुक्ला ने अदालत में बताया कि प्रीति और संजय ने जुलाई 2025 में लव मैरिज की थी, लेकिन शादी के एक महीने बाद संजय लापता हो गया।
संजय की मां और परिवार इस शादी से खुश नहीं थे। विशेष न्यायाधीश ने पुनरीक्षणकर्ता की सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ””डायल 112”” को बुलाना अपने आप में अपराध का सबूत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बलात्कार की शिकायत करने वाली लड़की को अपराधी नहीं माना जा सकता।
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अंत में, न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पुष्पा देवी रात्रे की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया और मामले से जुड़े रिकार्ड को ट्रायल कोर्ट को वापस भेजने के निर्देश दिए।




