छत्तीसगढ़

बिलासपुर में ‘ब्लैकआउट’ से हाहाकार:दावे हवा-हवाई,अफसरों ने बंद किए फोन, आक्रोशित लोगों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः शुक्रवार तड़के आई तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने बिलासपुर नगर निगम और बिजली विभाग की मानसून पूर्व तैयारियों के दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। मौसम बदलते ही शहर का एक बड़ा हिस्सा अंधकार में डूब गया, जिससे सरकारी दावों और जमीनी हकीकत का अंतर साफ नजर आया।

सकरी, उस्लापुर, कोनी, सेंदरी, सिरगिट्टी और मंगला जैसे क्षेत्रों में हालात इस कदर बदतर रहे कि 14 से 15 घंटे तक बिजली बहाल नहीं हो पाई। बिजली गुल होने का सीधा प्रहार शहर की जलापूर्ति पर पड़ा, जिसके कारण भीषण गर्मी और उमस के बीच हजारों लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते नजर आए। सबसे तीखा आक्रोश मंगला क्षेत्र में देखा गया, जहाँ रहवासियों ने विभाग के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

पेड़ों की डालियों ने तोड़ा सिस्टम का दम

शुक्रवार सुबह अचानक बदले मौसम के मिजाज और तेज हवाओं ने बिजली के जर्जर ढांचे को धराशायी कर दिया। शहर के कई हिस्सों में पेड़ों की बड़ी डालियां टूटकर हाईटेंशन और एलटी लाइनों पर जा गिरीं। इसके चलते मंगला क्षेत्र के वार्ड 13 व 14, अल्का एवेन्यू, दीनदयाल कालोनी, अभिषेक विहार और अभिषेक नगर जैसे रिहायशी इलाकों में सुबह से ही सन्नाटा पसर गया।

रहवासियों का गंभीर आरोप है कि इस इलाके का सिस्टम इतना कमजोर है कि हल्की हवा चलते ही बिजली बंद कर दी जाती है। बार-बार फाल्ट और कम क्षमता के ट्रांसफार्मर की शिकायतों के बावजूद विभाग केवल अस्थायी मरम्मत कर खानापूर्ति में जुटा है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

मध्य शहर में भी रही आंख-मिचौली

बिजली संकट का असर केवल बाहरी कालोनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के मध्य स्थित सरकंडा, नूतन चौक और चौबे कालोनी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी सुबह पांच बजे से दोपहर तीन बजे तक बिजली बंद रही। वहीं विनोबा नगर, मसानगंज, सरजू बगीचा, टिकरापारा, करबला, कुदुदंड, वसुंधरा नगर, हेमुनगर और 27 खोली जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में दिनभर बिजली की आंख-मिचौली चलती रही। इससे मध्यम और गरीब वर्ग के लोग, जिनके पास वैकल्पिक बिजली व्यवस्था (इनवर्टर) नहीं है, सबसे ज्यादा हलकान हुए।

अधिकारियों की बेरुखी से भड़की जनता

सकरी और उस्लापुर क्षेत्र की स्थिति सबसे दयनीय रही, जहां बिजली बहाल होने में पूरा दिन और आधी रात बीत गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि संकट के समय जब जिम्मेदार अधिकारियों और कंट्रोल रूम के नंबरों पर फोन किया जाता है, तो वे काल रिसीव नहीं करते।

अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं। पिछले साल आए तूफान के कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए लोगों ने कहा कि तब भी 24 घंटे बिजली बंद थी और इस बार भी विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है।

सड़क पर उतरे कोनी देवनगरवासी, किया चक्काजाम

कोनी देवनगर में बिजली संकट ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। यहां सुबह चार बजे से रात साढ़े आठ बजे तक बिजली गुल रही। जब पड़ोस के क्षेत्रों में बिजली आ गई और देवनगर अंधेरे में रहा, तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। शाम करीब साढ़े सात बजे 150 से अधिक रहवासियों ने बिलासा ताल स्थित सब-स्टेशन का घेराव कर प्रदर्शन किया।

आक्रोशित लोगों ने आधे घंटे तक सड़क पर डटकर चक्काजाम कर दिया। कर्मचारियों द्वारा सब-स्टेशन में फाल्ट सुधारने की जानकारी और सप्लाई शुरू होने के आश्वासन के बाद ही लोग वहां से हटे।

शाम को फिर हुआ ब्लैकआउट, दफ्तरों में लगी भीड़

शुक्रवार सुबह से परेशान लोगों को शाम 6 से 8 बजे के बीच कुछ राहत मिली ही थी कि दोबारा चली तेज हवाओं ने फिर से बत्ती गुल कर दी। यह राहत क्षणिक साबित हुई और शहर के अधिकांश हिस्सों में दोबारा ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। इसके बाद फ्यूज आफ काल दफ्तरों और सब-स्टेशनों में शिकायतकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग देर रात तक बिजली दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आए।

दिनभर शहर और आसपास क्षेत्रों में था यह हाल

व्यापक प्रभाव: मंगला, उस्लापुर और सकरी जैसे बड़े इलाकों में 15 घंटे तक सप्लाई ठप।

दोहरी मार: बिजली न होने से मोटर पंप नहीं चले, जिससे घरों में पानी का संकट गहराया।

कारण: आंधी से पेड़ों का गिरना और जर्जर तारों का टूटना मुख्य वजह।

जनता का आरोप: विभाग केवल ‘पैच वर्क’ कर रहा है, स्थायी समाधान और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन की ओर ध्यान नहीं है।

आक्रोशित लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी

परेशान नागरिकों ने दो टूक कहा है कि यदि ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने और जर्जर लाइनों को बदलने का स्थायी समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगे। वर्तमान में विभाग की टीमें फाल्ट सुधारने का दावा कर रही हैं, लेकिन बार-बार की ट्रिपिंग ने उपभोक्ताओं के विश्वास को हिला दिया है।

लापरवाही के बड़े सवाल

1. केवल कागजों पर मेंटेनेंस: हर साल मानसून पूर्व तैयारियों के नाम पर करोड़ों का बजट और शटडाउन लिया जाता है, लेकिन पेड़ों की डालियां छंटने का काम इस बार भी अधूरा रहा।

2. क्षमता से कम ट्रांसफार्मर: रिहायशी इलाकों (अल्का एवेन्यू, दीनदयाल कालोनी) में लोड के अनुसार ट्रांसफार्मर अपग्रेड नहीं किए गए हैं, जिससे हल्की हवा में भी फाल्ट आ जाता है।

3. ‘पैच वर्क’ की आदत: विभाग केवल अस्थायी सुधार कर खानापूर्ति कर रहा है, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा।



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