बिलासपुर और कोरबा में चोरी की 10 वारदातों का खुलासा, 20 लाख के जेवरात समेत पूर्व प्रिंसिपल गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक पूर्व स्कूल प्रिंसिपल और एक जूता कारोबारी शामिल थे। यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। आरोपियों ने मिलकर एक ऐसा गैंग तैयार किया था जो ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विभाग के अधिकारी बनकर घूमते थे और सर्वे के बहाने सूने मकानों की पहचान करते थे। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने बिलासपुर और कोरबा जिले में चोरी की 10 बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था।
एडिशनल एसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों का यह गिरोह सामान्य लोगों की तरह गांवों में प्रवेश करता था ताकि ग्रामीणों को उन पर कोई शक न हो। वे दिन के समय बाइक से ग्रामीण इलाकों की रेकी करते थे। जब उन्हें किसी मकान में ताला लगा हुआ दिखता था, तो वे उसे कृषि अधिकारी बनकर सर्वे करने की बात कहकर आसपास के लोगों को गुमराह करते थे। मौका मिलते ही वे घर का ताला तोड़कर भीतर घुस जाते और महज कुछ ही मिनटों में जेवर और नकदी समेटकर वहां से फरार हो जाते थे।
कोटा पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान विनोद कुमार वासुदेव (33 वर्ष), भूपेंद्र सिंह राठौर उर्फ गुरुजी (43 वर्ष) और राज प्रजापति उर्फ लल्लू (19 वर्ष) के रूप में हुई है। ये तीनों आरोपी कोरबा जिले के मानिकपुर क्षेत्र के डिपरापारा के निवासी हैं। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि बिलासपुर जिले के ग्रामीण थाना क्षेत्रों में दिनदहाड़े हो रही चोरी की घटनाओं में एक ही तरह का पैटर्न अपनाया जा रहा था, जिसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर इन्हें दबोचा।
एसीसीयू प्रभारी गोपाल सतपथी ने गिरोह के सदस्यों की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड विनोद कुमार वासुदेव है। विनोद स्नातक है और समाज में अपनी पहचान एक सामान्य कारोबारी के रूप में बनाए रखने के लिए उसने जूते की दुकान खोल रखी थी। गिरोह का दूसरा प्रमुख सदस्य भूपेंद्र सिंह राठौर है, जो स्नातकोत्तर है और पहले एक स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत था। नौकरी से निकाले जाने के बाद वह अपराध की दुनिया में कदम रख बैठा और चोरी की वारदातों में शामिल हो गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी राज प्रजापति उर्फ लल्लू इस गिरोह का तीसरा सदस्य है। ये तीनों मिलकर उन समयों का चुनाव करते थे जब ग्रामीण खेती-किसानी के काम से अपने घरों से बाहर रहते थे। आउटर में बने मकान इनके प्राथमिक निशाने पर होते थे। चोरी की वारदातों के दौरान ये आरोपी सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतते थे। वे अपना चेहरा कपड़े से ढककर रखते थे और हेलमेट पहनकर ही वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि आरोपियों ने चोरी की रकम का उपयोग विलासिता की वस्तुएं खरीदने में किया था। मास्टरमाइंड विनोद कुमार वासुदेव ने चोरी के पैसों से एक क्रेटा कार खरीदी थी और उसकी मासिक किस्तें भी चोरी की रकम से ही चुका रहा था। वहीं, आरोपी राज प्रजापति ने चोरी के पैसों से अपने चाचा के नाम पर एक बुलेट मोटरसाइकिल खरीदी थी। पुलिस ने इन दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है। इसके अलावा आरोपियों के पास से एक अन्य बाइक भी बरामद की गई है जिसका उपयोग वे रेकी करने के लिए करते थे।
इस गिरोह ने बिलासपुर जिले के कोटा, रतनपुर, बिल्हा, पचपेड़ी और बेलगहना चौकी क्षेत्र सहित कई ग्रामीण इलाकों में चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया था। पुलिस ने कुल 10 मामलों का खुलासा किया है, जिनमें बिलासपुर जिले के 9 प्रकरण और कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र का एक मामला शामिल है। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण, 1.30 लाख रुपये नकद और गुल्लक से चोरी किए गए 1,250 रुपये के सिक्के बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए कुल सामान की कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई है।
आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी काफी लंबा है। एएसपी मधुलिका सिंह ने बताया कि ये तीनों आरोपी पहले भी जांजगीर जिले में दिनदहाड़े चोरी करने के मामलों में जेल जा चुके हैं। साल 2022-23 के दौरान जांजगीर जिले में इनके खिलाफ चोरी के कुल 19 प्रकरण दर्ज किए गए थे। जेल से छूटने के बाद इन्होंने फिर से गिरोह बनाया और बिलासपुर के ग्रामीण इलाकों को अपना नया ठिकाना बनाया। फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



