भिलाई में साइबर ठगी की रकम का खेल उजागर, 13 गिरफ्तार; बैंक खातों में मिला 10 लाख से अधिक संदिग्ध लेन-देन

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए अपने बैंक खातों का इस्तेमाल कराने वाले म्यूल खाताधारकों के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई की है। थाना सुपेला, थाना भिलाई नगर और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने 13 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में इनके बैंक खातों से 10 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
कमीशन के लालच में खाते उपलब्ध कराने का आरोप
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधियों तक ठगी की रकम पहुंचाने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करके रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए इन खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपितों पर दो हजार से 15 हजार रुपये तक कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि आरोपितों ने बैंक खातों के साथ उनकी पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड भी अन्य लोगों को उपलब्ध कराए थे। गिरफ्तार खाताधारकों में 10 सुपेला और तीन भिलाई नगर क्षेत्र के हैं।
13 आरोपितों पर धाराओं के तहत कार्रवाई
सुपेला पुलिस ने अनिरुद्ध बेसरा (26), डिकेश साहू उर्फ गोल्डी (23), संदीप खन्ना (24), दिलबाग सिंह (30), शिव कुमार (32), सुमीत कुमार (26), रेहान कुरैशी (20), ललीत कुमार (24), भोज कुमार देवांगन (24) और धनेश्वर यादव (21) के खिलाफ धारा 318(2), 318(3), 318(4) के तहत कार्रवाई की है।
वहीं भिलाई नगर पुलिस ने अमित कुमार (43), गोपी सोनी (21) और प्रीति उपाध्याय के खिलाफ भी इन्हीं धाराओं के तहत कार्रवाई की है।
दो बैंकों के खातों में मिला संदिग्ध लेन-देन
जांच के दौरान थाना सुपेला क्षेत्र में बंधन बैंक से संबंधित 10 खाताधारकों के खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में होने की जानकारी मिली। वहीं थाना भिलाई नगर क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े तीन खातों के इस्तेमाल का पता चला।
पुलिस के मुताबिक म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम पहले इन खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ठगी की रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाना था।
एजेंटों के माध्यम से दस्तावेज पहुंचाने का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि एजेंटों के माध्यम से बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और बैंकिंग साधन साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।




