पहले प्लास्टिक का जुगाड़, अब सीमेंट का सुधार,उसलापुर स्टेशन पर दिखा नईदुनिया की खबर का जोरदार असर

‘नईदुनिया’ में खबर छपने के बाद बिलासपुर के उसलापुर स्टेशन पर रेलवे ने अपनी गलती सुधारते हुए प्लास्टिक की खतरनाक टैक्टाइल टाइल्स को उखाड़ दिया है और उन…और पढ़ें

HighLights
- अमृत भारत स्टेशन योजना में बड़ी लापरवाही उजागर।
- नईदुनिया में प्रमुखता से खबर छपने के बाद हरकत में आया रेल प्रशासन।
- गति शक्ति टीम की कार्यप्रणाली पर अब भी गंभीर सवाल।
नईदुनिया प्रतिनिधि,बिलासपुर: उसलापुर स्टेशन में मंडरा रहा खतरा टल गया है। रेल प्रशासन ने अपनी बड़ी गलती सुधार ली है। नईदुनिया में खबर प्रकाशित होने के बाद प्लेटफार्म पर लगी प्लास्टिक की टैक्टाइल उखाड़ दी गई है। इन्हें उखाड़ने के बाद सीमेंट की टैक्टाइल टाइल्स लगाई जा रही है।
टैक्टाइल प्लास्टिक की होने के कारण उनके स्क्रू निकल गए थे और जगह-जगह से उखड़ने के साथ मुड गए थे। इसके कारण दृष्टिबाधित यात्रियों को खतरा था। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत भारत स्टेशन में उसलापुर स्टेशन को भी शामिल किया गया। यहां पहले चरण में 15 करोड़ रुपये का कार्य हो भी गया है। लेकिन, योजना के तहत विकसित किए गए कार्यों की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गए थे।
दृष्टिबाधित यात्रियों को सुरक्षित मार्ग दिखाने के लिए स्टेशन के प्रवेश द्वार से लेकर पूरे प्लेटफार्म तक लगाई गई टैक्टाइल टाइल्स उद्घाटन से पहले ही उखड़ने लगी थी। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। निर्माण के दौरान एक बड़ी लापरवाही यह हुई थी कि सीमेंटयुक्त टैक्टाइल टाइल्स लगाने के बजाय प्लास्टिक की टाइल्स बिछाकर उन्हें स्क्रू से जड़ दिया गया। कई स्थानों पर ये टाइल्सें उखड़ चुकी थीं, जिससे उनका उद्देश्य ही प्रभावित हो गया है।
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नियमों के अनुसार, सार्वजनिक स्थलों पर टिकाऊ और मजबूत सीमेंटयुक्त टैक्टाइल टाइल्स का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि दृष्टिबाधित यात्रियों को सुरक्षित और निर्बाध मार्गदर्शन मिल सके। टाइल्सों को बिना चिपकाएं स्क्रू से कस दिया गया था। इसके चलते यह उखड़ने लगे हैं।
नईदुनिया ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर लापरवाही उजागर की। खबर के बाद रेल प्रशासन गलती सुधारने में जुट गई है। इसके तहत प्लेटफार्म के जितने हिस्से में प्लास्टिक की टैक्टाइल टाइल्सें लगीं थी, उन्हें उखाड़ दिया गया है। अब उसकी जगह पर सीमेंटयुक्त टैक्टाइल लगाई जा रही है। पहले उन्हें यही करना था। उस समय कुछ विभाग के जानकारों ने सुझाव भी दिया था। लेकिन, गति शक्ति टीम के अधिकारी उनकी नहीं सुनें। पहले प्लास्टिक और अब सीमेंट की टाइल्सें लगाकर बेवजह खर्च कर रहे हैं।
अब भी लापरवाही, सीमेंट टाइल्सें ठीक से नहीं जमी
उसलापुर स्टेशन में सीमेंटयुक्त टाइल्सें लगाने में अब भी लापरवाही हो रही है। जिन-जिन हिस्सों में इन्हें लगाई गई, वहां कुछ-कुछ टाइल्सें ठीक से नहीं जमी है। लगातार यात्रियों के पैर से दबावे पड़ने पर पकड़ कमजोर भी होने लगी है। इसकी मानिटरिंग गति शक्ति टीम के अधिकारियों को करनी है। लेकिन, वह नियमित निगरानी करते नजर नहीं आते।




