भिलाई के रिसाली में सफाई को लेकर विवाद, आयुक्त कक्ष के सामने धरने पर बैठी महापौर को आया चक्कर, अस्पताल में भर्ती

महापौर और सफाई कर्मियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके चलते नगर निगम के सभी वार्डों में पूरे दिन सफाई क …और पढ़ें

HighLights
- महापौर आयुक्तके कक्ष के सामने धरने पर बैठ गईं।
- उनके समर्थन में कांग्रेस के कई पार्षद भी मौजूद थे।
- दोपहर में महापौर अचानक अचेत होकर गिर पड़ीं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। रिसाली नगर निगम में सफाई ठेके को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को और गहरा गया। सुबह ठेका कर्मचारियों ने महापौर शशि सिन्हा के घर का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान महापौर और सफाई कर्मियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके चलते नगर निगम के सभी वार्डों में पूरे दिन सफाई कार्य ठप रहा, जिससे शहर में अव्यवस्था की स्थिति बन गई।
निगम कार्यालय खुलने के बाद महापौर शशि सिन्हा आयुक्त मोनिका वर्मा के कक्ष के सामने धरने पर बैठ गईं। उनके समर्थन में कांग्रेस के कई पार्षद भी मौजूद थे। लंबे समय तक धरने पर बैठने के दौरान दोपहर में महापौर अचानक अचेत होकर गिर पड़ीं। इसके बाद पार्षदों ने उन्हें तुरंत सेक्टर-9 अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया गया। घटना के दौरान निगम कार्यालय परिसर में पुलिस बल भी तैनात रहा।
उल्लेखनीय है कि रिसाली नगर निगम के गठन से पहले यह क्षेत्र भिलाई नगर निगम में शामिल था। वर्ष 2016 में सफाई कार्य के लिए किवार कंपनी को ठेका दिया गया था। नियमों के अनुसार ठेका कंपनी को कर्मचारियों का भविष्य निधि (पीएफ) शासन के खाते में जमा करना था, लेकिन कंपनी द्वारा पीएफ जमा नहीं किया गया।
ऐसी स्थिति से बचने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आदेश जारी किया कि श्रमिकों की नियुक्ति केवल एजेंसी के माध्यम से ही की जाएगी।
23 अप्रैल 2020 को जारी आदेश के अनुसार रिसाली निगम को सफाई कार्य के लिए केवल 288 कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रमिक रखने की अनुमति है और यह कार्य प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से ही कराया जाएगा।
आमतौर पर सफाई का ठेका एक वर्ष के लिए दिया जाता है, हालांकि 2020-21 और 2022-23 में महापौर परिषद ने इसे दो वर्ष तक बढ़ाया था। वर्ष 2024-25 की निविदा अवधि पूरी होने के बाद परिषद ने दो महीने का अतिरिक्त समय दिया।
अब दो दिन पहले एमआईसी में तय किया गया कि निगम सीधे इन सफाई कर्मियों से काम कराएगी और वेतन कर्मियों के खाते में दिया जाएगा। एमआईसी के इसी निर्णय के बाद से विवाद हो गया है।




