छत्तीसगढ़

भारतनेट को मिला ‘विशेष परियोजना’ का दर्जा, आरओडब्ल्यू आवेदनों के निपटारे में आएगी तेजी

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए भारतनेट परियोजना को अब विशेष परियोजना का दर्जा मिल गया है। केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग के निर्णय के अनुरूप राज्य शासन ने भारतनेट को लोकहित में ‘विशेष परियोजना’ के रूप में अधिसूचित किया है। इसके बाद नेटवर्क विस्तार के लिए जरूरी मार्ग के अधिकार (राइट ऑफ वे-आरओडब्ल्यू) से जुड़े आवेदनों के निपटारे में तेजी आएगी।

नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर भारतनेट से जुड़े आरओडब्ल्यू आवेदनों का निर्धारित नियमों और प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

भारतनेट को दूरसंचार (मार्ग के अधिकार) नियम, 2024 के अध्याय-4 की कंडिका 12(1) के तहत लोकहित में विशेष परियोजना के रूप में अधिसूचित किया गया है। राज्य में इन नियमों को एक जनवरी 2025 से यथास्वरूप लागू किया जा चुका है।

विशेष परियोजना का दर्जा मिलने से भारतनेट के तहत बिछाए जाने वाले ऑप्टिकल फाइबर केबल, नेटवर्क उपकरण और अन्य दूरसंचार अवसंरचना के लिए जरूरी अनुमति प्रक्रिया निर्धारित प्रावधानों के तहत प्राथमिकता से पूरी की जाएगी।

नगरीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि भारतनेट नेटवर्क की स्थापना, ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने तथा टावर और अन्य दूरसंचार अवसंरचना से संबंधित सभी आरओडब्ल्यू आवेदनों का निराकरण नियमों की कंडिका 12 में विशेष परियोजनाओं के लिए निर्धारित प्रविधानों के अनुसार किया जाए।

इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर अनुमति मिलने में लगने वाले समय को कम करना और नेटवर्क निर्माण में आने वाली प्रशासनिक अड़चनों को दूर करना है।

केंद्र के दूरसंचार विभाग की व्यवस्था के अनुसार मार्ग के अधिकार से संबंधित आवेदन और अनुमतियों की प्रक्रिया गतिशक्ति संचार पोर्टल अथवा राज्य के उन्नत पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से की जा रही है। इससे आवेदन जमा करने से लेकर अनुमति देने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय भी आसान होगा।

भारतनेट के नेटवर्क विस्तार में यह व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के लिए सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों से जुड़े आरओडब्ल्यू की अनुमति जरूरी होती है।

भारतनेट से संबंधित इस व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (चिप्स) तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच समन्वय के बाद निर्देश जारी किए गए हैं।

परिपत्र की प्रतिलिपि प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। नगरीय निकायों को विशेष परियोजना से जुड़े आरओडब्ल्यू आवेदनों का निपटारा संबंधित नियमों के अनुसार प्राथमिकता से करने को कहा गया है।

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