छत्तीसगढ़

76 जवानों की हत्या के मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी


ताड़मेटला माओवादी हमले से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपितों को बरी करने के निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 07 May 2026 06:58:03 PM (IST)Updated Date: Thu, 07 May 2026 06:58:03 PM (IST)

Sukma Tadmetla Attack: 76 जवानों की हत्या के मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी
ताड़मेटला हमले के सभी आरोपितों को हाईकोर्ट से राहत( सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. ताड़मेटला हमले के सभी आरोपितों को हाईकोर्ट से राहत
  2. कोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
  3. 76 जवानों की शहादत वाले मामले में सबूतों की कमी बनी वजह

राज्य ब्यूरो, रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुकमा के ताड़मेटला माओवादी हमले से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपितों को बरी करने के निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां आरोपियों के खिलाफ ठोस, वैज्ञानिक और कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूत पेश करने में नाकाम रहीं।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

क्या है मामला

यह मामला 6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला जंगल में हुए बड़े माओवादी हमले से जुड़ा है। माओवादियों ने सीआरपीएफ और पुलिस पार्टी पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें 75 सीआरपीएफ जवान और एक पुलिसकर्मी सहित कुल 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने कई स्थानीय ग्रामीणों के खिलाफ हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

जांच में मिलीं गंभीर खामियां

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां पाईं। न तो कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने आया और न ही किसी गवाह ने अदालत में आरोपितों की पहचान की। आरोपितों की टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं कराई गई। आर्म्स एक्ट के तहत आवश्यक अभियोजन स्वीकृति रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थी। पुलिस द्वारा बरामद बताए गए हथियारों और विस्फोटकों की एफएसएल रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश नहीं की गई।

हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

डिवीजन बेंच ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 76 जवानों की शहादत जैसे संवेदनशील मामले में भी वास्तविक दोषियों को कानून के कटघरे तक नहीं लाया जा सका। कोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े हमले की जांच में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य जुटाने में भारी लापरवाही बरती गई।



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!