वेदांत पॉवर प्लांट में धमाके से प्रत्यक्षदर्शियों के चेहरे पर खौफ, बोले- भूकंप की तरह हिला था फ्लोर, मलबे में थे साथियों के शव

रायगढ़ वेदांता प्लांट धमाके में मजदूरों ने भयावह मंजर देखा। तेज विस्फोट से भगदड़ मची, कई श्रमिक घायल हुए। हादसे के बाद प्लांट में डर और असुरक्षा का मा …और पढ़ें

HighLights
- तेज धमाके से प्लांट में अचानक भगदड़ और अफरा-तफरी मची
- प्रत्यक्षदर्शियों ने धुएं और मलबे में फंसे साथियों को देखा
- हादसे के बाद मजदूरों में दहशत और असुरक्षा का माहौल
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायगढ़। वेदांता प्लांट में हुए भीषण धमाके ने पूरे परिसर को दहला दिया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास काम कर रहे मजदूरों के बीच अचानक भगदड़ मच गई और घटनास्थल पर चीख-पुकार के साथ अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी दीपांकर की मौत के बाद प्रत्यक्षदर्शी मजदूर आशुतोष दास (39) और सुपरवाइजर सुभन्नो दास (49) जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करवा रहे थे।
इस दौरान नईदुनिया से चर्चा में उन्होंने रुंधे कंठ से बताया कि घटना के समय वे प्लांट के दूसरे फ्लोर पर काम कर रहे थे, जबकि उनके कुछ साथी नीचे मौजूद थे। अचानक हुए तेज धमाके से पूरा फ्लोर भूकंप की तरह हिल गया और कुछ पल के लिए सभी स्तब्ध रह गए।
उन्होंने बताया कि धमाके के बाद नीचे का दृश्य भयावह था। धुएं और मलबे के बीच फंसे साथियों को देखकर हर कोई घबरा गया। जान बचाने की कोशिश में मजदूर इधर-उधर भागते नजर आए।
मजदूरों में काम को लेकर दहशत
- प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मृतक साथी और वे हाल ही में करीब दो माह पहले ही काम पर लगे थे। वहीं, इस हादसे के बाद से मजदूरों के बीच खौफ का माहौल है। जो लोग इस हादसे में बच गए, उनके चेहरों पर जहां एक ओर जिंदा बचने की राहत है, वहीं दूसरी ओर घटना की दहशत साफ झलक रही है।
- बहरहाल, हादसे के कारणों का अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है, लेकिन इस घटना ने प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद श्रमिकों के बीच असुरक्षा और भय का माहौल साफ नजर आ रहा है, जिससे प्लांट प्रबंधन के लिए भी चुनौती बढ़ सकती है।
लोगों ने मिला संभलने का मौका
- कुछ सेकंड में बदल गया सब प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाका इतना अचानक और तेज था कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में सामान्य कामकाज का माहौल भयावह मंजर में बदल गया।
- मजदूरों के अनुसार, यदि वे दूसरे फ्लोर पर नहीं होते, तो शायद उनकी स्थिति भी नीचे काम कर रहे साथियों जैसी होती। हादसे के बाद से प्लांट में काम कर रहे श्रमिकों के बीच डर का माहौल बना हुआ है। श्रमिक अब यहां काम करने से डर रहे हैं और दोबारा नहीं आने की बात कह रहे हैं।



