छत्तीसगढ़

Supreme Court:पुणे के पोर्श हादसा मामले में बड़ा फैसला, तीन आरोपियों को जमानत मिली; 2024 में हुई थी दो मौतें – Supreme Court: Major Decision In Pune Porsche Accident Case, 3 Accused Granted Bail; 2 People Killed In 2024


सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के चर्चित पुणे पोर्श कार हादसा मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। इस हादसे में दो आईटी पेशेवरों की मौत हो गई थी। कोर्ट ने इस दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में माता-पिता की जिम्मेदारी भी तय होती है, क्योंकि वे अपने नाबालिग बच्चों पर सही नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं।

जज ने परिजनों को लेकर की सख्त टिप्पणी 

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा, ‘नशे की समस्या अलग बात है, लेकिन बच्चों को कार की चाबियां और खुला पैसा देना ताकि वे ऐश कर सकें, यह बिल्कुल अस्वीकार्य है।’

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जमानत पाने वाले आरोपी कौन?


  • अमर संतोष गायकवाड़: आरोप है कि उसने तीन लाख रुपये देकर एक डॉक्टर के सहायक के जरिए नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल बदलवाया।

  • आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल: इनके खून के सैंपल जांच में इस्तेमाल किए गए थे, जबकि वे कार में मौजूद दो नाबालिगों से जुड़े बताए गए।

बॉम्बे हाई कोर्ट से खारिज हुई थी आरोपियों की याचिका

इससे पहले दिसंबर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमर गायकवाड़ समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था और अब तीनों को जमानत दे दी गई है। इस मामले में ब्लड सैंपल बदलने के मामले में कुल 10 लोगों को जेल भेजा गया था, जिनमें नाबालिग के माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे और श्रीहरी हालनोर, ससून अस्पताल का कर्मचारी अतुल घाटकांबले, और दो बिचौलिए शामिल हैं।

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पुणे पोर्श हादसा और नाबालिग पर विवाद

पुणे शहर में 18-19 मई 2024 की दरम्यानी रात को करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार को तेज गति से दौड़ाने के चक्कर में 17 साल के लड़के ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। गाड़ी की टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक अपना संतुलन खोकर काफी दूर तक सड़क पर घिसटते चली गई, जिससे उस पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के 14 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था। जब विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी। इसके बाद पुणे पुलिस के आग्रह पर जेजेबी ने आदेश बदला और नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेजा। हालांकि, जून 2024 में हाई कोर्ट ने नाबालिग की रिहाई का आदेश दे दिया।



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