छत्तीसगढ़

सुकमा में निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग तेज, कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों का सुना दर्द; जिला मुख्यालय पहुंची भीड़


छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल मामलों में जेल में बंद बताए जा रहे निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग तेज हो गई है।

Publish Date: Sat, 18 Jul 2026 07:20:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 18 Jul 2026 07:33:59 PM (IST)

सुकमा में निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग तेज, कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों का सुना दर्द; जिला मुख्यालय पहुंची भीड़
जेलों में बंद ग्रामीणों की रिहाई की मांग हुई तेज

HighLights

  1. कांग्रेस ने न्याय दिलाने का भरोसा दिया
  2. हरीश कवासी ने परिवारों से मुलाकात की
  3. परिजनों ने आर्थिक परेशानियां साझा कीं

नईदुनिया न्यूज, सुकमा। नक्सल मामलों में वर्षों से जेल में बंद बताए जा रहे निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग अब सुकमा जिले में तेज होती दिखाई दे रही है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने तिम्मापुरम सहित प्रभावित गांवों का दौरा किया और जेल में बंद लोगों के परिजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। परिवारों की पीड़ा सुनने के बाद उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि कोई व्यक्ति निर्दोष है तो उसे न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस हर स्तर पर आवाज उठाएगी।

परिजनों ने सुनाई संघर्ष और इंतजार की कहानी

तिम्मापुरम गांव की सोनमती यादव ने बताया कि उनके पति नंगा पिछले साढ़े तीन वर्षों से जेल में बंद हैं। पति की अनुपस्थिति में दो छोटे बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई है। उन्होंने बताया कि कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए परिवार की गाय और बकरियां बेचकर 25 हजार रुपये वकील को दिए, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका।

इसी गांव के माड़वी दिनेश ने कहा कि उनके पिता माड़वी हूंगा पिछले दो वर्षों से जेल में हैं। उनके अनुसार, उनके पिता स्वयं सरेंडर करने पहुंचे थे, लेकिन बाद में उन्हें चिंतलनार ले जाकर जेल भेज दिया गया।

आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे परिवार

वेट्टी हूँगी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि करीब तीन वर्ष पहले उनके पति वेट्टी लखमा और बेटे वेट्टी रेनू को एक साथ घर से ले जाया गया था। परिवार ने धान बेचकर अब तक 40 हजार रुपये वकीलों की फीस पर खर्च किए हैं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने बताया कि बेटे की शादी के महज दस दिन बाद ही उसे हिरासत में ले जाया गया था और उसकी पत्नी आज भी उसके लौटने का इंतजार कर रही है।

निष्पक्ष समीक्षा और शीघ्र न्याय की मांग

मुलाकात के दौरान हरीश कवासी ने कहा कि जिन आदिवासियों के संबंध में यह दावा किया जा रहा है कि वे निर्दोष हैं, उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी के खिलाफ पर्याप्त आधार नहीं हैं तो उसे जल्द न्याय मिलना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों की बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी से भी दूरभाष पर बात कराई। विधायक ने आश्वासन दिया कि इन मामलों को गंभीरता से उठाया जाएगा और न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

परिजनों ने भी मांग की कि जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, उनकी शीघ्र समीक्षा कर निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए, ताकि लंबे समय से कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे परिवारों को राहत मिल सके।



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