छत्तीसगढ़

सुकमा में हिड़मा के गढ़ करीगुंडम में विकास की दस्तक, 100% पीएम आवास स्वीकृत, अब बिजली की मांग


करीगुंडम, जो कभी नक्सली गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चित रहा, अब विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।

Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 06:13:27 PM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jun 2026 06:13:27 PM (IST)

सुकमा में हिड़मा के गढ़ करीगुंडम में विकास की दस्तक, 100% पीएम आवास स्वीकृत, अब बिजली की मांग
बिजली की समस्या उठाई, राज्य महिला आयोग की सदस्य ने समाधान का भरोसा दिया

HighLights

  1. कभी नक्सली कमांडर हिड़मा का गढ़ रहे करीगुंडम में अब विकास कार्यों को मिली रफ्तार
  2. पंचायत के लिए 719 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत, हर परिवार को पक्का घर देने का लक्ष्य
  3. बिजली की समस्या उठाई, राज्य महिला आयोग की सदस्य ने समाधान का भरोसा दिया

नईदुनिया प्रतिनिधि,कोंटा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड का ग्राम पंचायत करीगुंडम, जो कभी नक्सली गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चित रहा, अब विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 160 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र कभी दुर्दांत नक्सली कमांडर हिड़मा, बारसे देवा और पापाराव का प्रभाव क्षेत्र माना जाता था। लेकिन सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आज यहां विकास की नई बयार दिखाई दे रही है।

दुर्गम रास्तों का सफर तय कर करीगुंडम पहुंचीं

इसी बदलाव को देखने और ग्रामीणों से संवाद करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं अधिवक्ता दीपिका शोरी दुर्गम रास्तों का सफर तय कर करीगुंडम पहुंचीं। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया। किसी औपचारिक मंच या वीआईपी व्यवस्था के बजाय उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बिछी चटाई पर बैठकर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। उनकी इस सादगीपूर्ण पहल से ग्रामीणों में विश्वास और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

करीगुंडम पंचायत के अंतर्गत कुल आठ पारा शामिल हैं

करीगुंडम पंचायत के अंतर्गत कुल आठ पारा शामिल हैं, जिनमें तीन वनग्राम भी आते हैं। लगभग 4,500 की आबादी वाले इस क्षेत्र में वर्तमान में 554 परिवार निवासरत हैं। परिवारों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए शासन द्वारा यहां कुल 719 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दीपिका शोरी ने कहा कि शत-प्रतिशत प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति यह दर्शाती है कि सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में पंचायत का कोई भी परिवार कच्चे मकान में नहीं रहेगा।

कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं

हालांकि विकास की दिशा में कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं, लेकिन ग्रामीणों ने बिजली की समस्या को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया। उन्होंने बताया कि पड़ोसी ग्राम पालोड़ी तक बिजली पहुंच चुकी है, जो करीगुंडम से मात्र पांच किलोमीटर दूर है, लेकिन इसके बावजूद पंचायत के अधिकांश घर आज भी अंधेरे में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र शासन की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्लानार’ योजना में शामिल होने के बावजूद अब तक विद्युत सुविधा से वंचित है।



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