ससुर ने डिलीवरी का खर्च उठाया, तो प्रताड़ना का सवाल ही नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की जस्टिस रजनी दुबे की एकलपीठ ने जशपुर के एक दहेज मृत्यु मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पति सुभाष चंद्र और ससुर भगवान चंद्र यादव …और पढ़ें

HighLights
- जशपुर सत्र न्यायालय का फैसला हाई कोर्ट में पलटा
- दहेज हत्या का दोष सिद्ध करने के लिए पुख्ता सबूत जरूरी
- 12 साल पुराने मामले में पति-ससुर बरी
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाई कोर्ट ने दहेज हत्या और प्रताड़ना के एक संवेदनशील मामले में ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पलटते हुए एक ही परिवार के पांच सदस्यों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि जब ससुर ने बहू की डिलीवरी का खर्च उठाया और मायके वालों के खाते में पैसे भेजे, तो यह व्यवहार दहेज के लिए प्रताड़ित करने वाले परिवार का नहीं हो सकता।
जशपुर जिले के सुभाष चंद्र यादव का विवाह 23 अप्रैल 2012 को रजनी यादव से हुआ। विवाह के डेढ़ साल बाद, 21 नवंबर 2013 को रजनी ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका के परिवार ने आरोप लगाया कि ससुराल वाले रजनी को मोटरसाइकिल की मांग को लेकर प्रताड़ित कर रहे थे। पुलिस ने मामले में दहेत हत्या व प्रताड़ना का मामला दर्ज किया था। 2014 में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने इन आरोपों को सही मानते हुए पति और ससुर को 7-7 साल की सजा सुनाई थी। इस आदेश के खिलाफ सुभाष चन्द्र व भगवान चन्द्र यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाई कोर्ट में आरोपियों के वकील जे.के. सक्सेना ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि मृतका को मौत से पहले दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था। मृतका के पिता ने अदालत में स्वीकार किया कि रजनी की डिलीवरी का खर्च उसके ससुर ने उठाया था और 20,000 रुपये भी ट्रांसफर किए थे। कोर्ट ने इसे आपसी सौहार्द का उदाहरण माना।
बचाव पक्ष की गवाह ने बताया कि शादी के समय आरोपित परिवार के पास पहले से तीन मोटरसाइकिलें थीं, जिससे एक और गाड़ी के लिए प्रताड़ना का कोई औचित्य नहीं था। मायके वालों ने प्रताड़ना की बात तो कही, लेकिन कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था और न ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान मृतका की मानसिक स्थिति और उसके परिवार की पृष्ठभूमि भी सामने आई। कोर्ट ने पाया कि मृतका की खुदकुशी के पीछे उसकी व्यक्तिगत मानसिक स्थिति भी एक कारण हो सकती है।



