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शांति एक्ट:मसौदा नियमों पर अमेरिकी परमाणु उद्योग देगा सुझाव, लाइसेंस से जवाबदेही तक के उठाएगा मुद्दे – Us-nuclear-industry-shanti-act-draft-rules-india-nuclear-sector


अमेरिकी परमाणु उद्योग भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी का रास्ता खोलने वाले शांति (SHANTI) अधिनियम को लागू करने के लिए प्रस्तावित नियमों और विनियमों पर भारत सरकार को व्यापक सुझाव देगा। परमाणु ऊर्जा विभाग ने पिछले सप्ताह शांति अधिनियम के मसौदा नियम और विनियम जारी किए थे। विभाग ने इन पर 4 सितंबर तक सुझाव मांगे हैं।

यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) ने इस साल की शुरुआत में अमेरिकी परमाणु उद्योग के प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा कराया था। इसका उद्देश्य असैन्य परमाणु क्षेत्र में अवसरों की तलाश करना था। यूएसआईएसपीएफ ने गुरुवार को भारत के कानूनी विशेषज्ञों और यहां स्थित न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट के साथ मसौदा नियमों पर चर्चा की।

अमेरिका कर रहा क्या तैयारी?

यूएसआईएसपीएफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ”यूएसआईएसपीएफ 4 सितंबर की समय सीमा तक भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग को उद्योग की ओर से व्यापक सुझाव देने की प्रक्रिया में समन्वय कर रहा है।” यूएसआईएसपीएफ ने हाल ही में जारी शांति के मसौदा नियमों और विनियमों पर अपनी न्यूक्लियर इंडस्ट्री कमेटी के लिए एक ऑनलाइन ब्रीफिंग भी आयोजित की।

फोरम ने कहा कि इस ऑनलाइन बैठक में परमाणु क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन से जुड़े वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें मसौदा शांति नियमों और विनियमों के प्रमुख प्रावधानों और उनके उद्योग पर असर, निजी क्षेत्र के प्रवेश, लाइसेंसिंग, जवाबदेही और परियोजनाओं की संरचना से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। यूएसआईएसपीएफ ने कहा कि बैठक में उद्योग की ओर से ध्यान दिए जाने वाले मुद्दों और सरकार को दिए जा सकने वाले सुझावों पर भी चर्चा हुई।

अमेरिकी बैठक मेंं कौन-कौन रहा शामिल?

फोरम के मुताबिक, दिल्ली स्थित पीएलआर चैंबर्स के विशेषज्ञ सुहान मुखर्जी और न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट में राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के वरिष्ठ निदेशक टेड जोन्स ने ऑनलाइन बैठक को संबोधित किया। मसौदा नियम भारत के परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में उठाए गए पहले विस्तृत कदम हैं। इनमें लाइसेंस, बीमा और मंजूरी से जुड़ी प्रक्रियाएं तय की गई हैं। हालांकि, संवेदनशील गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा।

शांति अधिनियम भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के लिए खोलता है। इसके तहत निजी कंपनियां परमाणु संयंत्रों का निर्माण, स्वामित्व और संचालन कर सकेंगी। उन्हें संयंत्रों को बंद करने और परमाणु अनुसंधान एवं विकास का काम करने की भी अनुमति होगी।

शांत अधिनियम देता है क्या अनुमति?

अधिनियम निजी क्षेत्र को परमाणु ईंधन के निर्माण की भी अनुमति देता है। इसके अलावा, बिजली उत्पादन के अलावा दवाओं, कृषि और अन्य उद्योगों में आयनीकरण विकिरण के इस्तेमाल का प्रावधान भी है। भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) स्थापित करने का लक्ष्य है। ये उन्नत परमाणु विखंडन संयंत्र हैं, जो 300 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन कर सकते हैं।



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