छत्तीसगढ़

‘साहब, हमें पानी दिलाओ…’, बिलासपुर के इमलीभाठा में बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार, कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाओं का फूटा गुस्सा


बिलासपुर के इमलीभाठा इलाके में गहराए पेयजल संकट से परेशान महिलाएं मंगलवार को कलेक्टर के दरबार गुहार लगाने पहुंचीं। सरकार के सुशासन तिहार के बड़े-बड़े …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 03 Jun 2026 11:16:32 AM (IST)Updated Date: Wed, 03 Jun 2026 11:16:32 AM (IST)

'साहब, हमें पानी दिलाओ...', बिलासपुर के इमलीभाठा में बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार, कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाओं का फूटा गुस्सा
कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाओं का फूटा गुस्सा

HighLights

  1. इमलीभाठा में आधा किमी दूर से ढो रहीं महिलाएं बोलीं
  2. कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाओं का फूटा गुस्सा, बोलीं- हमें दिलाओ पानी
  3. पानी के चलते मजदूर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। इमलीभाठा इलाके में गहराए पेयजल संकट से परेशान महिलाएं मंगलवार को कलेक्टर के दरबार गुहार लगाने पहुंचीं। सरकार के सुशासन तिहार के बड़े-बड़े दावों के बीच महिलाओं ने कलेक्टर से कहा कि साहब हमें पानी दिलाओ। मोहल्ले के अधिकांश हैंडपंप सूखने से यहां बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।

सरकंडा इमलीभाठा इलाके में पानी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। गंभीर पेयजल किल्लत से आक्रोशित होकर मोहल्ले की मनीषा कारके और गनेशिया बाई के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाएं मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं।

उन्होंने नगर निगम प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराई। रहवासियों का आरोप है कि भीषण गर्मी के दौर में क्षेत्र के अधिकांश बोर और हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। हालात इस कदर बदतर हैं कि रोज मजदूरी करने वाले परिवारों को अपनी प्यास बुझाने के लिए प्रतिदिन आधा से एक किलोमीटर दूर जाकर पानी ढोना पड़ रहा है।

महिलाओं ने बताया कि हाल ही में आयोजित हुए सुशासन तिहार में भी वार्डवासियों ने गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग द्वारा अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।

हैरानी की बात यह है कि प्रभावित इलाके में अब तक नगर निगम द्वारा एक भी पानी का टैंकर नहीं भेजा गया है। 1300 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम बजट होने के बाद भी शहरी क्षेत्र के रहवासी पानी जैसी मूलभूत सुविधा को तरस रहे हैं। कलेक्टरेट पहुंचीं महिलाओं ने प्रशासन से तत्काल टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति शुरू करने की मांग की है।

मजदूर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

इमलीभाठा क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश परिवार रोज कमाने-खाने वाले मजदूर हैं। स्थानीय निवासी मनीषा कारके और गनेशिया बाई ने बताया कि सुबह उठकर दूर से पानी ढोने में ही उनका आधा दिन निकल जाता है। इसके कारण वे समय पर मजदूरी पर भी नहीं जा पा रही हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।



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