छत्तीसगढ़

पत्नी झगड़ा करती है, पिछले 15 साल से बेटी-दामाद के साथ रह रही, पति ने मांगा तलाक; हाई कोर्ट ने कहा पक्का सबूत चाहिए


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तलाक की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की पत्नी पिछले 15 साल से अपनी बेटी व दामाद के घर में रह रही है …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 01 Feb 2026 09:30:03 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Feb 2026 09:44:19 AM (IST)

पत्नी झगड़ा करती है, पिछले 15 साल से बेटी-दामाद के साथ रह रही, पति ने मांगा तलाक; हाई कोर्ट ने कहा पक्का सबूत चाहिए
हाई कोर्ट ने खारिज की तलाक की याचिका (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 15 साल से बेटी व दामाद के साथ रह रही पत्नी
  2. इसी आधार पर पति ने की थी तलाक की मांग
  3. पक्के सबूत नहीं होने पर याचिका खारिज हुई

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तलाक की मांग को लेकर पति की ओर से दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि 35 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते में तलाक के लिए पक्का सबूत अनिवार्य है। याचिकाकर्ता की पत्नी पिछले 15 साल से अपनी बेटी व दामाद के घर में रह रही है। इसी को प्रताड़ना बताते हुए उसने इसे तलाक का आधार बनाया था।

बेमेतरा जिला निवासी गिरधर दुबे पेशे से पुजारी हैं। उन्होंने परिवार न्यायालय में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की याचिका दायर की थी। पति का कहना था कि उनकी पत्नी पिछले करीब 15 साल से उन्हें छोड़कर बेटी और दामाद के साथ रह रही है। पत्नी उनसे झगड़ा करती थी और मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी।

दोनों की शादी करीब 35 साल पहले हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। दोनों का विवाह हो चुका है। पत्नी के अलग रहने की बात कहकर इसे ही प्रताड़ना बताते हुए इसे तलाक का आधार बताया था। पांच जुलाई 2023 को पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए गिरधर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

क्रूरता साबित हुई न परित्याग

जस्टिस संजय अग्रवाल जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की है। इस दौरान पत्नी ने पति की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पति गाली-गलौच, मारपीट और चरित्र पर शक करते थे। पत्नी ने यह भी बताया कि वह ब्लड प्रेशर और शुगर की मरीज है, लेकिन पति ने कभी उनके इलाज का खर्च नहीं उठाया। मजबूरी में उन्हें बेटी के घर रहना पड़ा।

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अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि तलाक के लिए क्रूरता और परित्याग के ठोस और स्पष्ट प्रमाण जरूरी है। इस मामले में न तो क्रूरता साबित हुई और न ही परित्याग। ऐसे में कोर्ट ने पति की अपील खारिज कर दी और बेमेतरा फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी का पति से अलग रहना तलाक का आधार नहीं हो सकता। क्रूरता साबित करने के लिए ठोस घटनाएं, साफ आरोप और पुख्ता सबूत जरूरी होते हैं। पति के गवाहों के बयान सामान्य पाए गए हैं और उन पर भरोसा नहीं किया जा सकका।

महिला प्रकोष्ठ की काउंसलिंग रिपोर्ट से पत्नी के आरोप अधिक विश्वसनीय लगे। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए भी साफ किया कि तलाक जैसे गंभीर मामले में सिर्फ अंदाजा या सामान्य आरोपों के आधार पर फैसला नहीं दिया जा सकता।



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