राजनीति

प्रदेश कांग्रेस में घर वापसी शुरू, 20 निष्कासित नेताओं-कार्यकर्ताओं का निष्कासन रद्द

प्रदेश कांग्रेस में निष्कासित नेताओं और कार्यकर्ताओं की घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने अलग-अलग जिलों के 20 निष्कासित नेताओं और कार्यकर्ताओं का निष्कासन रद कर दिया है। हालांकि, पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह व जोगी परिवार समेत 16 नेताओं की वापसी पर अभी निर्णय नहीं हुआ है।

प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति की 18 सितंबर को हुई बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर पीसीसी ने रविवार को 20 नेताओं के निष्कासन रद्द करने का आदेश जारी किया है। प्रभारी महामंत्री (संगठन एवं प्रशासन) मलकीत सिंह गैदू की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अनुशासन समिति के निर्णय के अनुसार संबंधित नेताओं का निष्कासन तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है।

पहली सूची में रायपुर, मुंगेली, गरियाबंद, कोंडागांव और राजनांदगांव जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग कारणों से संगठन से बाहर किए गए नेताओं की वापसी की प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है। इसे आगामी समय में संगठन को सक्रिय और मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने शुक्रवार को पार्टी से निष्कासित 36 नेताओं की वापसी के आवेदनों पर मंथन किया था। कुछ मामलों में निष्कासन समाप्त कर पार्टी में वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जबकि कुछ प्रकरणों पर संबंधित जिला कांग्रेस कमेटियों से अभिमत मांगा गया था। बैठक में पूर्व विधायक डाॅ. रेणु जोगी, अमित जोगी और बृहस्पति सिंह के आवेदनों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, प्रकरण लंबित रखे गए थे।

रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने भी कांग्रेस में वापसी के लिए आवेदन किया था। उन्होंने पार्टी को माफीनामा भेजकर दोबारा संगठन में शामिल किए जाने का अनुरोध किया था। वर्ष-2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद बृहस्पति सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आरोप लगाए थे।

जुलाई 2021 में उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव पर अपने गार्ड के वाहन पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया था। उन्होंने सिंहदेव से अपनी जान को खतरा होने की बात भी कही थी। बाद में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें छह वर्ष के लिए कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था।

जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं का निष्कासन रद्द किया गया है, उनमें रायपुर के आनंद कुकरेजा, पूनम पांडेय, विशाल रजानी, मुंगेली के पार्षद विनय चोपड़ा, गरियाबंद के गोरेलाल सिन्हा, राघोवा महाड़िक, भविष्य प्रधान, ऋतिक सिन्हा, भानुप्रताप साहू, सुशील सोनी, कोंडागांव के सगीर खान, राजनांदगांव के सिध्दार्थ डोंगरे, राजेश गुप्ता, जितेश सिमनकर, सकूर चौहान, सुनीता सिन्हा, आशीष सोनकर, शशांक डोंगरे, श्यामबती सिन्हा और अंजू बंजारे शामिल हैं।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के कांग्रेस में विलय का मामला भी फिलहाल अटका हुआ है। जोगी कांग्रेस का मामला सीधे तौर पर पार्टी के विलय से जुड़ा है, इसलिए इस पर नए प्रदेश प्रभारी के साथ विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। इस पर प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व निर्णय लेगा। शीर्ष नेतृत्व ही पार्टी विलय पर निर्णय ले सकती है। बैठक में भी चर्चा के बाद मामले को लंबित रखा गया था।

– धनेन्द्र साहू, अध्यक्ष, कांग्रेस अनुशासन समिति

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