छत्तीसगढ़

पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी भी फैमिली पेंशन की हकदार


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी भी फैमिली पेंशन पाने की हकदार है। कोर्ट ने कहा कि पेंशन नियम ‘सामाजिक …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 19 Jul 2026 01:40:36 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Jul 2026 03:49:35 PM (IST)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी भी फैमिली पेंशन की हकदार
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

HighLights

  1. कोर्ट ने पेंशन को ‘सामाजिक सुरक्षा का अधिकार’ माना।
  2. कोर्ट ने एक से अधिक विधवाओं की स्थिति को भी सुरक्षित किया।
  3. अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली दूसरी पत्नी पेंशन की भी अधिकारिणी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भले ही अवैध हो, लेकिन इससे दूसरी पत्नी को पेंशन के अधिकार से स्वतः वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कल्याणकारी प्रावधान हैं और इनकी व्याख्या उदारतापूर्वक की जानी चाहिए। अदालत ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 4 सितंबर 2021 के आदेश को निरस्त करते हुए दूसरी पत्नी अन्नपूर्णा पांडेय को 12 सप्ताह के भीतर फैमिली पेंशन एवं समस्त परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया।

मामला गुंडाधुर कृषि अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर में सहायक लेखाकार रहे मनोकांत पांडेय से जुड़ा है। पहली पत्नी पुष्पलता उपाध्याय के रहते उन्होंने अन्नपूर्णा पांडेय से दूसरा विवाह किया, जिनसे तीन बेटियां हैं। 11 सितंबर 2007 को कर्मचारी के निधन के बाद दोनों पत्नियों के बीच सिविल कोर्ट में समझौता हुआ। इसके तहत पहली पत्नी को फैमिली पेंशन और दूसरी पत्नी को भविष्य निधि की राशि तथा अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार मिला। इसके बाद अन्नपूर्णा पांडेय को 24 जून 2010 को सहायक ग्रेड-1 के पद पर नियुक्ति दी गई।

31 अक्टूबर 2020 को पहली पत्नी पुष्पलता उपाध्याय का निधन हो गया। उनके कोई संतान या अन्य कानूनी वारिस नहीं थे। इसके बाद अन्नपूर्णा पांडेय ने पारिवारिक पेंशन का दावा किया, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि पहली पत्नी के रहते किया गया दूसरा विवाह शून्य है, इसलिए वे वैध पत्नी नहीं मानी जा सकतीं।

हाई कोर्ट बोला- पेंशन नियम पर्सनल ला से अलग

अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन नियम 47(7) में एक से अधिक विधवाओं को पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान मौजूद है। पेंशन का अधिकार उत्तराधिकार कानून या हिंदू विवाह अधिनियम से नहीं, बल्कि सेवा नियमों से संचालित होता है। मद्रास हाई कोर्ट के एस. कामाक्षी प्रकरण का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि पेंशन सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है, इसलिए इसकी व्याख्या तकनीकी आधार पर नहीं बल्कि कल्याणकारी दृष्टिकोण से की जानी चाहिए।

अनुकंपा नियुक्ति देने के बाद पेंशन से इनकार अनुचित

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विभाग स्वयं अन्नपूर्णा पांडेय को कर्मचारी की पत्नी मानकर पहले अनुकंपा नियुक्ति दे चुका है। पहली पत्नी के निधन के बाद कोई अन्य प्रतिस्पर्धी दावेदार भी नहीं बचा। ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित करने का कोई कानूनी औचित्य नहीं है।

12 सप्ताह में पेंशन और एरियर देने का आदेश

हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय और संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 12 सप्ताह के भीतर अन्नपूर्णा पांडेय को पारिवारिक पेंशन स्वीकृत कर समस्त बकाया (एरियर) एवं अन्य परिणामी लाभों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।



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