हाथ में लेकर पटाखे जलाना खतरनाक, डॉ. कालडा ने दी गंभीर चोट से बचने की सलाह

दीपावली का त्योहार खुशियां बांटने और अपनों के साथ मिलकर उत्सव मनाने का एक विशेष अवसर होता है। इस दौरान आतिशबाजी भी इन खुशियों का एक अभिन्न हिस्सा होती है। छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में दीपावली के अवसर पर पटाखों की गूंज सुनाई दे रही है, जहां गली-मोहल्लों से लेकर खुले मैदानों तक लोग उत्साहपूर्वक आतिशबाजी कर रहे हैं। हालांकि, इस उत्सव के दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही त्योहार की खुशियों को गंभीर हादसों और अस्पताल के चक्कर में बदल सकती है। पटाखों से हाथ-पैर झुलसने, आंखों में गंभीर चोट लगने और तेज आवाज के कारण सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
कई बार पटाखों से हुए हादसे के बाद लोग जले हुए हिस्से पर तुरंत टूथपेस्ट, घी या तेल जैसे घरेलू उपचार लगा देते हैं, जिससे समस्या और भी बढ़ सकती है। इसलिए, पटाखे जलाते समय अत्यधिक सावधानी बरतने के साथ-साथ, किसी भी दुर्घटना की स्थिति में शुरुआती मिनटों में सही प्राथमिक उपचार की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। रायपुर के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी स्पेशलिस्ट डॉ. सुनील कालडा ने सुरक्षित दीपावली मनाने के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां और जलने या चोट लगने पर तत्काल क्या करना चाहिए, इस बारे में विस्तृत जानकारी दी है।
डॉ. कालडा के अनुसार, यदि पटाखे से हाथ, पैर या शरीर का कोई अन्य हिस्सा जल जाए, तो सबसे पहले प्रभावित व्यक्ति को आग और पटाखों से दूर एक सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहिए। इसके बाद, जले हुए हिस्से को सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे लगभग 20 मिनट तक लगातार रखना चाहिए। डॉ. कालडा स्पष्ट करते हैं कि जलने पर प्राथमिक उपचार के नाम पर टूथपेस्ट लगाना बिल्कुल भी सही नहीं है। जले हुए हिस्से पर घर में मौजूद किसी भी तरह का लेप लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह संक्रमण और अन्य जटिलताओं को बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में, बिना समय गंवाए जल्द से जल्द किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
आंखों, कानों या चेहरे पर चोट लगने की स्थिति में भी घरेलू उपचार में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। पटाखों से निकलने वाली चिंगारी और बारूद के छोटे कण आंखों में जा सकते हैं, वहीं तेज धमाके से कानों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। यदि आंख में चिंगारी या बारूद का कण चला जाए, तो आंख को साफ बहते पानी से धीरे-धीरे धोना चाहिए। आंख को रगड़ने या उसमें फंसी किसी भी चीज को खुद निकालने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। इसके तुरंत बाद अस्पताल जाकर विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। तेज धमाके के बाद यदि कान में दर्द, सीटी जैसी आवाज, सुनने में कमी या चक्कर आने की शिकायत हो, तो तत्काल ईएनटी (ENT) डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। चेहरे पर जलने, सांस लेने में परेशानी, धुएं के कारण लगातार खांसी या बेहोशी की स्थिति में भी तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
पटाखों के साथ छेड़छाड़ करना या उन्हें हाथ में लेकर जलाना अत्यंत खतरनाक हो सकता है। पटाखों को उनकी बनावट और इस्तेमाल के निर्देशों के अनुसार ही जलाना चाहिए। रॉकेट, अनार या अन्य पटाखों को हाथ में लेकर जलाने की गलती कभी न करें, क्योंकि ऐसा करने से पटाखा हाथ में ही फट सकता है और गंभीर चोट लग सकती है। पटाखे जलाने के लिए जल्दबाजी न करें। डॉ. कालडा के मुताबिक, अगरबत्ती या लंबी फुलझड़ी की मदद से पटाखे जलाना अधिक सुरक्षित रहता है, क्योंकि इससे हाथ और पटाखे के बीच पर्याप्त दूरी बनी रहती है। पटाखे जलाने से पहले आसपास की जगह को पूरी तरह खाली कर लेना चाहिए। रॉकेट और अनार जैसे पटाखों के लिए हमेशा खुली जगह का चुनाव करें, जहां आसपास मकान, वाहन, पेड़ या बिजली के तार न हों। एक समय में केवल एक ही पटाखा जलाएं और बाकी लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखें।
बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखना भी आवश्यक है। पटाखों से निकलने वाला धुआं आंखों और गले में जलन पैदा कर सकता है, जबकि तेज आवाज से कानों को नुकसान पहुंच सकता है। डॉ. सुनील कालडा के अनुसार, ज्यादा बारूद और तेज आवाज वाले पटाखों से बचना चाहिए। इसके बजाय, कम आवाज वाले और स्काई शॉट जैसे विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। बच्चों को पटाखे जलाने के लिए कभी भी अकेला न छोड़ें; उन्हें हमेशा बड़े लोगों की कड़ी निगरानी में ही आतिशबाजी करने दें। पटाखे जलाते समय छोटे बच्चों को गोद में लेकर आतिशबाजी करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे उनके चोटिल होने का खतरा बढ़ जाता है।
पटाखे जलाते समय सही कपड़ों का चुनाव भी हादसों से बचा सकता है। ढीले और लहराते कपड़े, जैसे दुपट्टा, साड़ी का पल्लू, लंबा कुर्ता या खुली बाजू वाले कपड़े आसानी से आग की चपेट में आ सकते हैं। पटाखे जलाते समय शरीर से फिट और मोटे सूती कपड़े पहनना सबसे बेहतर होता है। सिंथेटिक कपड़ों से बचें, क्योंकि आग या तेज गर्मी के संपर्क में आने पर ये पिघलकर त्वचा से चिपक सकते हैं, जिससे गंभीर चोट लग सकती है। इसके अलावा, अपने बालों को अच्छी तरह बांधकर रखें और पैरों में बंद जूते पहनें। चप्पल पहनकर पटाखे जलाने से पैर में चिंगारी या जलते बारूद से चोट लगने का खतरा रहता है।
दीपावली के दौरान पटाखों के अलावा दीयों, मोमबत्तियों और बिजली की सजावट से भी आग लगने का खतरा बना रहता है। इसलिए, घर में एक इमरजेंसी किट तैयार रखना चाहिए। इस किट को ऐसी जगह रखें, जहां जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत इस्तेमाल किया जा सके। घर में एक बाल्टी पानी और रेत भी तैयार रखनी चाहिए। इस्तेमाल किए हुए पटाखों को पानी से भरी बाल्टी में डालना चाहिए, ताकि उनमें बची हुई चिंगारी से दोबारा आग न लगे। इस वर्ष दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6: 05 बजे से रात 8 बजे तक रहेगा।



