छत्तीसगढ़ में कोचिंग संस्थानों पर कड़ा शिकंजा, फीस से सुरक्षा तक हर पहलू पर जवाबदेही तय

छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के संचालन को विनियमित करने के लिए एक नया कानून लाने की तैयारी में है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए ‘छत्तीसगढ़ कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक-2026’ का प्रारूप तैयार किया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत, 20 या इससे अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले सभी कोचिंग सेंटरों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यह विधेयक कोचिंग संचालकों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाएगा और उन्हें विद्यार्थियों की सुरक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए जवाबदेह बनाएगा।
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, कोचिंग संचालक अब मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे। यदि कोई विद्यार्थी बीच में ही कोचिंग छोड़ देता है, तो उसे नियमानुसार फीस वापस करनी होगी। यह नियम विद्यार्थियों के वित्तीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, कोचिंग संस्थानों को फीस और पाठ्यक्रम से संबंधित सभी जानकारी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावक और विद्यार्थी सही निर्णय ले सकें।
विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को भी इस विधेयक में प्राथमिकता दी गई है। जिन कोचिंग संस्थानों के साथ हॉस्टल संचालित होते हैं, वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना संचालकों की जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों के निराकरण के लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाने के साथ-साथ 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू करने का भी प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों से कोचिंग संचालकों की जिम्मेदारी सिर्फ कक्षा में पढ़ाई कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह विद्यार्थियों के समग्र कल्याण तक विस्तारित होगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर कोचिंग सेंटरों पर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा। विधेयक में 10 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर मामलों में कोचिंग सेंटर का पंजीकरण रद्द भी किया जा सकेगा। प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक, पंजीकृत कोचिंग सेंटरों की वैधता पांच साल होगी, जिसके बाद उन्हें नवीनीकरण कराना होगा।
इस नए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एक मजबूत ढांचा प्रस्तावित किया गया है। विधेयक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्यस्तरीय प्राधिकरण और जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला समितियां बनाने का प्रस्ताव है। ये प्राधिकरण और समितियां कोचिंग संस्थानों के संचालन और नियमों के पालन पर कड़ी नजर रखेंगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ गंभीर मामलों में कोचिंग सेंटर का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार भी इनके पास होगा।
यह विधेयक अभी प्रारूप के स्तर पर है और इसे अंतिम रूप देने से पहले उच्च शिक्षा विभाग ने विभिन्न हितधारकों से सुझाव और अभिमत मांगे हैं। अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों से सात दिनों के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां भेजने का आग्रह किया गया है। विधेयक का प्रारूप विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा, और इच्छुक लोग अपने सुझाव che-higheredu.cg@gov.in पर ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं।
यह कदम केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2024 में जारी किए गए कोचिंग सेंटरों के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें राज्यों को अपने यहां कानून बनाने के लिए कहा गया था। बिहार, गोवा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और मणिपुर जैसे राज्यों में पहले से ही कोचिंग के नियम लागू हैं, जबकि हरियाणा, असम, झारखंड और राजस्थान ने इससे संबंधित अधिनियम बनाए हैं। आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी नियम जारी हुए हैं, और तमिलनाडु, त्रिपुरा तथा नागालैंड में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक कोचिंग संचालन के लिए कोई अलग कानून नहीं था, और यह प्रस्तावित विधेयक प्रदेश में पहली बार एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करेगा।



