छत्तीसगढ़

ऊंची पगार का लालच देकर दो बालिकाओं को ले गया था कर्नाटक, कोर्ट ने मानव तस्कर को 10 साल की सजा


कर्नाटक ले जाने के बाद इन्हें एक व्यापारी के गन्ने के खेत में काम पर लगा दिया था। दोनों बालिकाओं को झांसा दिया गया था कि उन्हें 12000 रुपये मेहनताना द…और पढ़ें

Publish Date: Fri, 10 Jul 2026 08:23:05 PM (IST)Updated Date: Fri, 10 Jul 2026 08:26:12 PM (IST)

ऊंची पगार का लालच देकर दो बालिकाओं को ले गया था कर्नाटक, कोर्ट ने मानव तस्कर को 10 साल की सजा
मानव तस्‍करी पर सजा। एआई फोटो।

HighLights

  1. कर्नाटक ले जाने के बाद इन्हें एक व्यापारी के गन्ने के खेत में काम पर लगा दिया था।
  2. दोनों बालिकाओं को झांसा दिया गया था कि उन्हें 12000 रुपये मेहनताना दिया जाएगा
  3. लेकिन बालिकाओं को झोपड़ी में रहना पड़ता था और मेहनताना नहीं दिया जा रहा था।

नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर। विशेष न्यायाधीश एनआइए अंबिकापुर शक्ति सिंह राजपूत की अदालत में जशपुर जिले के मानव तस्कर को 10 वर्ष कारावास तथा पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि नहीं देने पर दोषी को छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र के ग्राम टांगरगांव (कृष्णानगर) निवासी मनीराम (30) ने छह अक्टूबर 2024 को जशपुर जिले के बागबहार थाना क्षेत्र के एक गांव की दो बालिकाओं को बेहतर काम और ऊंची पगार का लालच देकर कर्नाटक ले गया था।

कर्नाटक ले जाने के बाद इन्हें एक व्यापारी के गन्ने के खेत में काम पर लगा दिया था। दोनों बालिकाओं को झांसा दिया गया था कि उन्हें 12000 रुपये मेहनताना दिया जाएगा लेकिन बालिकाओं को झोपड़ी में रहना पड़ता था और एक रुपये का भी मेहनताना नहीं दिया जा रहा था।

जब इन्होंने वापस आने की कोशिश की तो उन्हें मारा पीटा भी जाता था। उन्हें बोला जाता था कि उनके लाने के बदले राशि आरोपित मनीराम ले गया है। इधर बालिकाओं के लापता होने के बाद स्वजन ने पुलिस की मदद ली थी। पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ था कि मनीराम ही बालिकाओं को लेकर गया है।

पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। पुलिस ने चार माह बाद दोनों बालिकाओं को आरोपित मनीराम की निशानदेही पर कर्नाटक से बरामद किया था। प्रकरण में आरोपित मनीराम के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(3) के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया था।

प्रकरण के सारे तथ्यों की सुनवाई और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश (एनआइए) शक्ति सिंह राजपूत की अदालत ने मनीराम को भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 ( 3) का दोषी पाया अदालत ने उसे 10 वर्ष कारावास तथा 5000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।



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