छत्तीसगढ़

मुंबई क्राइम ब्रांच का अफसर बन लूटे 1.67 करोड़, रायपुर पुलिस ने दिल्ली और कर्नाटक से तीन ठगों को पकड़ा


नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। मुंबई और दिल्ली क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर लोगों को ’डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाने वाले साइबर ठगों के अंतरराज्यीय गिरोह का रायपुर रेंज साइबर थाना ने पर्दाफाश किया है। आरोपितों ने दो मामलों में एक करोड़ 67 लाख की ठगी की थी।

पुलिस ने दिल्ली से आर्यन सिंह, कर्नाटक के हुबली से जितेंद्र कुमार और डोंगरगढ़ निवासी राजदीप सिंह भाटिया उर्फ यश भाटिया को गिरफ्तार किया है। आरोपित लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग, सीबीआई जांच और गिरफ्तारी का भय दिखाकर घंटों वीडियो कॉल पर बंधक बनाते थे और फिर करोड़ों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।

आपरेशन साइबर शील्ड के तहत कार्रवाई और म्यूल खातों का खुलासा

रेंज पुलिस द्वारा चलाए जा रहे आपरेशन साइबर शील्ड के तहत यह कार्रवाई की गई। जांच में राजफाश हुआ कि आरोपितों द्वारा इस्तेमाल किए गए म्यूल बैंक खातों में 10.76 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। इन खातों से देश के 17 राज्यों में 88 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी हुई हैं। इनमें लिंक फ्रॉड, शेयर ट्रेडिंग, पार्ट टाइम जॉब फ्रॉड, क्रिप्टो ट्रेडिंग, फिशिंग, लॉटरी फ्रॉड, होटल बुकिंग फ्रॉड और ओएलएक्स फ्रॉड जैसे मामले शामिल हैं।

ऐसे करते थे ’डिजिटल अरेस्ट’

पुलिस के अनुसार साइबर ठग पहले पीड़ित को फोन कर खुद को क्राइम ब्रांच, सीबीआई या अन्य केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताते थे। इसके बाद पीड़ित के पहचान पत्र, बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी गतिविधियों में होने की झूठी जानकारी देकर डराया जाता था।

फिर गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पीड़ित को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रखा जाता था। ठग पीड़ित को किसी से बात नहीं करने देते थे और मानसिक दबाव बनाकर बैंक खातों से रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। इसके बाद रकम को कई लेयर वाले म्यूल खातों में घुमाकर निकाल लिया जाता था।

1.25 करोड़ और 42 लाख की ठगी के मामले

पहले मामले में प्रार्थी सपन कुमार से मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले में विधानसभा थाना में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपित आर्यन सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार किया।

जांच के दौरान करीब 60 लाख रुपये की राशि होल्ड कर पीड़ित को वापस भी कराई गई है। दूसरे मामले में पुष्पा अग्रवाल को दिल्ली क्राइम ब्रांच और सीबीआई केस का डर दिखाकर करीब 42 लाख रुपये ठगे गए। कोतवाली थाना में दर्ज मामले की जांच के दौरान आरोपित जितेंद्र कुमार को कर्नाटक के हुबली से गिरफ्तार किया गया। आरोपित सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम करता था और तकनीकी तरीके से साइबर ठगी को अंजाम देता था।

104 म्यूल अकाउंट का नेटवर्क और गिरफ्तारी

तीसरे मामले में सिविल लाइन थाना में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामले की जांच में उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के 104 म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम का उपयोग सामने आया। इस मामले में पहले ही 92 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जांच के दौरान आरोपित राजदीप सिंह भाटिया उर्फ यश भाटिया की भूमिका सामने आने पर उसे भी गिरफ्तार किया गया। यह राजनांदगांव में ढाबा का संचालन करता था।

साइबर ठगी से बचने के उपाय

  • कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या ’डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।
  • पुलिस, सीबीआई या ईडी कभी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती।
  • डराने या गोपनीयता बनाए रखने का दबाव डाला जाए तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
  • अनजान लिंक, एपीके फाइल और स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें।
  • साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत करें।

पुलिस महानिरीक्षक का बयान

साइबर ठगों के खिलाफ आपरेशन साइबर शील्ड के तहत कार्रवाई की जा रही है। तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। ठगी से बचने के लिए लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत है। अनजान नंबर से आए फोन से डरने के बजाय पुलिस को सूचना दें। किसी तरह के लालच या झांसे में न आएं। – अमरेश मिश्रा, आईजी, रायपुर रेंज



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!