छत्तीसगढ़

कोरबा में जंगल के बीच बस में गूंजी नवजात की किलकारी, देवदूत बने यात्रियों ने निभाया इंसानियत का फर्ज


सोमवार की रात कोरबा से पटना जा रही राजहंस बस में घने जंगल और मूसलाधार बारिश के बीच अंबिकापुर-बलरामपुर मार्ग पर एक नवविवाहिता सुनती देवी को अचानक प्रसव…और पढ़ें

Publish Date: Tue, 07 Jul 2026 12:50:59 PM (IST)Updated Date: Tue, 07 Jul 2026 12:50:59 PM (IST)

कोरबा में जंगल के बीच बस में गूंजी नवजात की किलकारी, देवदूत बने यात्रियों ने निभाया इंसानियत का फर्ज

HighLights

  1. प्रसव पीड़ा उठने पर महिला यात्रियों ने कराया सुरक्षित प्रसव
  2. इलाज के लिए यात्रियों ने मिलकर जुटाए नौ हजार रुपये
  3. मूसलाधार बारिश और जंगल के बीच महिला यात्री सुनीता बाई ने बस में कराया सुरक्षित प्रसव

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: इंसानियत की मिसाल पेश करने वाली एक भावुक घटना सोमवार की रात कोरबा से पटना जा रही राजहंस यात्री बस में सामने आई। करीब 35 यात्रियों को लेकर निकली बस अंबिकापुर पार कर बलरामपुर की ओर बढ़ रही थी। तेज बारिश के बीच रात करीब साढ़े 11 बजे कोरबा निवासी नवविवाहिता सुनती देवी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। यह उनका पहला बच्चा था और वह अपने पति के साथ पटना स्थित ससुराल जा रही थीं।

अचानक आई इस स्थिति से बस में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन चालक और यात्रियों ने सूझबूझ का परिचय दिया। बस को सड़क किनारे रोका गया और महिला यात्री सुनीता बाई समेत अन्य महिलाओं तथा बस स्टाफ ने सीमित संसाधनों के बीच सुरक्षित प्रसव कराया। करीब आधे घंटे की कोशिश के बाद नवजात के रोने की आवाज गूंजते ही बस में मौजूद सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली।

इसके बाद पता चला कि दंपति के पास अस्पताल में इलाज और अन्य जरूरी खर्च के लिए पर्याप्त राशि नहीं है। यह जानकारी मिलते ही यात्रियों ने मानवता का परिचय देते हुए अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया- किसी ने सौ रुपये तो किसी ने पांच सौ रुपये दिए, और देखते ही देखते नौ हजार रुपये एकत्र हो गए।

बस बलरामपुर पहुंचते ही प्रसूता और नवजात को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों की जांच कर उपचार शुरू किया। मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकों की निगरानी में हैं। पूरी घटना ने यह साबित कर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी अनजान लोग एक परिवार की तरह साथ खड़े हो सकते हैं। जंगल, बारिश और रात के अंधेरे के बीच जन्मे इस नवजात के लिए बस में सवार यात्री किसी फरिश्ते से कम साबित नहीं हुए। उनकी संवेदनशीलता और सहयोग की यह मिसाल लंबे समय तक याद रखी जाएगी।



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!