छत्तीसगढ़ में कैंसर स्क्रीनिंग अभियान में गंभीर अनियमितता: बच्चों की जांच से लेकर डमी नंबरों पर हजारों एंट्री

छत्तीसगढ़ में कैंसर की समय पर पहचान और रोकथाम के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्क्रीनिंग अभियान में बड़े पैमाने पर गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की अपनी ही प्रदर्शन रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें दो साल तक की छोटी बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र में तो एक साल के बच्चे की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग भी कागजों में कर दी गई है, जबकि सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, इन तीनों प्रकार के कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग केवल 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की ही की जानी है।
विभागीय रिकॉर्ड के विस्तृत विश्लेषण से पता चला है कि दुर्ग के धमधा, बालोद के गुंडरदेही, कबीरधाम के कुकदुर, सरगुजा के लखनपुर और अंबिकापुर के रेवपुर जैसे क्षेत्रों में दो साल तक की बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग दर्ज की गई है। राजनांदगांव और बेमेतरा जिलों में भी स्क्रीनिंग के रिकॉर्ड में इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं, जो अभियान की गंभीरता और क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
अनियमितताओं का यह मामला केवल बच्चों की उम्र तक ही सीमित नहीं है। प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों बीजापुर और सुकमा में कैंसर स्क्रीनिंग के रिकॉर्ड में मोबाइल नंबरों के उपयोग में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इन क्षेत्रों में कुछ चुनिंदा मोबाइल नंबरों पर ही हजारों लोगों की स्क्रीनिंग दर्ज कर दी गई है। उदाहरण के तौर पर, बीजापुर में एक ही डमी नंबर (8888…) पर 263 लोगों की जांच दर्ज है। वहीं, सुकमा में मोबाइल नंबर 940646… पर 2, 720, नंबर 758745… पर 1, 382 और नंबर 969103… पर 1, 611 स्क्रीनिंग एंट्री दर्ज मिली हैं। इस प्रकार, इन चार मोबाइल नंबरों पर कुल 5, 976 एंट्री दर्ज की गई हैं। एक ही मोबाइल नंबर पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग दर्ज होने से इन रिकॉर्डों की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन नंबरों का इस्तेमाल साझा संपर्क नंबर के रूप में किया गया था या वास्तव में बिना किसी वास्तविक जांच के ही एंट्री दर्ज कर दी गईं।
यह गंभीर गड़बड़ियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब छत्तीसगढ़ प्रदेश में कैंसर के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच राज्य में कैंसर के कुल 17, 611 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही, प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 43 लोगों की कैंसर से मौत होने का दावा किया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
कैंसर स्क्रीनिंग डेटा दर्ज करने की व्यवस्था में भी खामियां उजागर हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रीनिंग के रिकॉर्ड में सबसे अधिक गड़बड़ी पाई गई है। यहां कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) निर्धारित मोबाइल एप्लिकेशन पर जांच का डेटा दर्ज करते हैं। इस डेटा की निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था ब्लॉक स्तर पर की जाती है। इसके बाद डेटा जिला मुख्यालय पहुंचता है, जहां जिला डेटा मैनेजर इसकी जांच कर राज्य स्तर पर भेजते हैं। संबंधित कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पर भी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी होती है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2024 से जून 2026 तक के 27 महीनों की अवधि में सामने आए 17, 611 नए कैंसर मामलों में सबसे अधिक 4, 465 मामले मुख कैंसर के हैं। इसके बाद स्तन कैंसर, पेट कैंसर और गर्भाशय कैंसर के मरीज शामिल हैं। रायपुर के मेकाहारा स्थित क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में भी हर साल लगभग 4, 500 से 5, 000 नए मरीज दर्ज हो रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से मुख, स्तन और गर्भाशय कैंसर के मरीज शामिल होते हैं।
इस गड़बड़ी पर सवाल उठ रहे हैं कि जब स्क्रीनिंग का डेटा दर्ज करने वाला एप्लिकेशन 30 साल से कम उम्र के लोगों की एंट्री को आगे बढ़ाने का विकल्प ही नहीं देता, तो एक-दो साल के बच्चों की जांच सिस्टम में कैसे दर्ज हो गई? सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ का दावा है कि ऐसी एंट्री केवल एडमिन स्तर पर ही संभव हैं। दुर्ग जिले के एनसीडी कार्यक्रम के नोडल अफसर डॉ. श्रवण दनौरिया ने धमधा क्षेत्र में डेटा गड़बड़ी को स्वीकार करते हुए संबंधितों को सुधार के लिए नोटिस जारी किया है और कार्रवाई की बात कही है।
इस मामले में विभिन्न अधिकारियों के जवाब भी सामने आए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के संभागाध्यक्ष भोज कुमार ने बताया कि जिस ऐप पर वे ग्राउंड से स्क्रीनिंग का डेटा दर्ज करते हैं, उसमें 30 साल से कम उम्र होने पर आगे के विकल्प नहीं खुलते, इसलिए कम उम्र के हितग्राहियों की एंट्री एडमिन स्तर पर ही संभव है। धमधा की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. रचना अग्रवाल ने कहा कि 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की ही स्क्रीनिंग की जानी है और ग्रामीण स्तर पर सीएचओ डेटा दर्ज करते हैं, इसमें बीएमओ की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने ऐसी गड़बड़ी को गलत बताते हुए जांच करवाने की बात कही। जिला नोडल अधिकारी, स्क्रीनिंग एवं एनसीडी कार्यक्रम डॉ. श्रवण दनौरिया ने ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओरल कैंसर स्क्रीनिंग के डेटा में गड़बड़ी पकड़े जाने की पुष्टि की और धमधा क्षेत्र में गड़बड़ी स्वीकारते हुए संबंधित लोगों को नोटिस देकर डेटा में सुधार करवाने के साथ कार्रवाई करने की जानकारी दी। दुर्ग की एडमिन एवं जिला डेटा मैनेजर राखी सोनी ने छुट्टी पर होने का हवाला देते हुए एनसीडी कंसल्टेंट या सीएमएचओ से बात करने को कहा। कैंसर स्क्रीनिंग के रिकॉर्ड में गड़बड़ी को लेकर सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी से भी जवाब मांगा गया, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।


