*कापू तहसील में ₹20 हजार के इनवर्टर विवाद ने पकड़ा तूल! राहुल टंडन बोले- भुगतान मांगने पर फंसाने की दी गई धमकी, चोरी का आरोप बेबुनियाद; बिल, दस्तावेज और गवाहों के नाम पुलिस को सौंपे*

कापू/रायगढ़। कापू तहसील कार्यालय से जुड़े करीब 20 हजार रुपये के इनवर्टर भुगतान का विवाद अब गंभीर आरोप-प्रत्यारोप में बदलता नजर आ रहा है। कापू निवासी राहुल टंडन ने कापू थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर तत्कालीन/वर्तमान तहसीलदार उन्मेश पटेल पर गाली-गलौज, कथित जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
राहुल टंडन का दावा है कि उन्होंने 13 अगस्त 2025 को कापू तहसील कार्यालय में इनवर्टर लगाया था, जिसकी करीब 20 हजार रुपये की राशि का भुगतान अब तक लंबित है। उनका कहना है कि भुगतान के लिए कई बार संपर्क करने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया गया। टंडन ने अपनी शिकायत के साथ इनवर्टर की खरीदी से संबंधित बिल और घटना के कथित प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी पुलिस को देने का दावा किया है।
13 अगस्त 2025 को लगाया था इनवर्टर, अब तक भुगतान का दावा
राहुल टंडन के अनुसार, 13 अगस्त 2025 को उन्होंने कापू तहसील कार्यालय में इनवर्टर लगाया था। उनका दावा है कि इनवर्टर की कीमत करीब 20 हजार रुपये थी, लेकिन लंबे समय बाद भी उसका भुगतान नहीं किया गया।
टंडन का कहना है कि बकाया राशि के भुगतान को लेकर उन्होंने कई बार तहसीलदार से संपर्क किया। उनका आरोप है कि भुगतान की मांग को लेकर ही बाद में विवाद की स्थिति बनी।
11 सितंबर को तहसील गेट के बाहर विवाद का आरोप
राहुल टंडन की शिकायत के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 की शाम करीब 5 बजे तहसील गेट के बाहर भुगतान को लेकर उनकी तहसीलदार उन्मेश पटेल से बातचीत हुई।
टंडन का आरोप है कि बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और उनके साथ सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज की गई। उन्होंने तहसीलदार पर कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और उन्हें झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।
राहुल टंडन का कहना है कि इस घटना से उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित होना पड़ा और इसी को लेकर उन्होंने पुलिस में लिखित शिकायत दी।
न इनवर्टर का पैसा मिला, न चोरी की-फिर आरोप क्यों?’
इनवर्टर चोरी के आरोपों को राहुल टंडन ने पूरी तरह गलत बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने स्वयं तहसील कार्यालय जाकर इनवर्टर नहीं निकाला था, बल्कि उनका स्टाफ वहां गया था।
टंडन के मुताबिक, उनका स्टाफ तहसील कार्यालय में मौजूद बाबू एवं अन्य कर्मचारियों से पूछताछ और अनुमति लेने के बाद इनवर्टर बाहर लेकर आया था। उनका दावा है कि जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो उनके स्टाफ द्वारा इनवर्टर को दोबारा तहसील कार्यालय में लगा दिया गया।
राहुल टंडन का कहना है कि यदि उनकी मंशा चोरी करने की होती तो इनवर्टर को दोबारा कार्यालय में क्यों लगाया जाता। उन्होंने इनवर्टर की खरीदी और स्थापना से संबंधित बिल एवं अन्य दस्तावेज उपलब्ध होने की बात कही है।
अगर चोरी हुई तो पुलिस शिकायत की स्थिति स्पष्ट हो’- राहुल टंडन
राहुल टंडन ने सवाल उठाया है कि यदि वास्तव में तहसील कार्यालय से शासकीय इनवर्टर चोरी हुआ है, तो इसकी लिखित शिकायत पुलिस में कब और किसके द्वारा की गई? उनका कहना है कि यदि इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई है तो उसकी प्रति और अब तक की गई आधिकारिक कार्रवाई भी सामने आनी चाहिए।
हालांकि, इस संबंध में पुलिस या तहसील प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है। इसलिए इनवर्टर चोरी से संबंधित आरोप और शिकायत की स्थिति फिलहाल जांच का विषय है।
चार लोगों सहित अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के नाम शिकायत में
राहुल टंडन ने अपनी पुलिस शिकायत में घटना के समय मौके पर मौजूद बताए गए सौरभ सिंह, युवराज बंजारा, राजेश रात्रे और आनंद कुमार जांगड़े सहित अन्य लोगों का उल्लेख किया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि ये लोग कथित बातचीत और विवाद के प्रत्यक्षदर्शी हैं। उन्होंने पुलिस से इन लोगों के बयान दर्ज करने, इनवर्टर से संबंधित बिल एवं दस्तावेजों की जांच करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
18 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावाराहुल टंडन का
दावा है कि पुलिस में शिकायत दिए हुए 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने पुलिस से अपनी शिकायत में लगाए गए गाली-गलौज, कथित जातिसूचक टिप्पणी और धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
राहुल टंडन ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई

राहुल टंडन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। उनके मुताबिक, इनवर्टर की खरीदी का बिल, उसकी स्थापना से जुड़े दस्तावेज, भुगतान का रिकॉर्ड, तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड और घटना के कथित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
वहीं, तहसीलदार पक्ष की ओर से राहुल टंडन के आरोपों को गलत बताया गया है और संबंधित इनवर्टर को शासकीय संपत्ति बताया गया है।
ऐसे में अब इनवर्टर की खरीदी और भुगतान से जुड़े दस्तावेज, तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड, पुलिस में दर्ज शिकायत तथा कथित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति सामने लाने में अहम साबित हो सकते हैं।
फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। राहुल टंडन अपनी शिकायत पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 20 हजार रुपये के भुगतान से शुरू हुआ यह विवाद आखिर किस वजह से इतना बढ़ा और इनवर्टर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता क्या है।



