छत्तीसगढ़
कैदियों की रिहाई पर बिलासपुर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- एक ही मामले में दो अलग-अलग मापदंड क्यों?


याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) में दलील दी कि इसी मामले में सह-आरोपी राकेश केवट की भूमिका भी समान थी, लेकिन उसके रिहाई आवेदन पर सकारात्मक राय दी गई। जबकि रामफल के मामले में बिना ठोस वजह के आपत्ति जताई गई। याचिकाकर्ता ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जिला न्यायालय की राय केवल एक प्रक्रिया का हिस्सा है, अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।



