छत्तीसगढ़

कागजों में बने 186 मकान, जमीन पर शून्य… 26 साल पुराने 1.86 करोड़ के हाउसिंग लोन घोटाले में दो गिरफ्तार


मामले में गिरफ्तार आरोपियों में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी और सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 18 Mar 2026 06:11:16 PM (IST)Updated Date: Wed, 18 Mar 2026 06:11:16 PM (IST)

कागजों में बने 186 मकान, जमीन पर शून्य... 26 साल पुराने 1.86 करोड़ के हाउसिंग लोन घोटाले में दो गिरफ्तार
26 साल पुराने 1.86 करोड़ के हाउसिंग लोन घोटाले में दो गिरफ्तार

HighLights

  1. रायपुर के 26 साल पुराने गबन केस में ACB की कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार
  2. 1.86 करोड़ का ऋण घोटाला, कागजों पर बने मकान, रिमांड पर भेजे गए दोषी
  3. पुरानी फाइलों से निकला भ्रष्टाचार, 18 मार्च 2026 को हुई बड़ी गिरफ्तारी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी में 26 साल पुराने गृह निर्माण ऋण गबन प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वर्ष 2000 में दर्ज इस मामले में लंबे समय बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए 18 मार्च 2026 को आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। गिरफ्तार आरोपियों में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी और सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर के तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू शामिल हैं। दोनों को न्यायालय में पेश कर 25 मार्च 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

सरकारी योजना के नाम पर बड़ा खेल: 1.86 करोड़ का फर्जीवाड़ा

जांच में सामने आया कि वर्ष 1995 से 1998 के बीच शासन की आवासीय योजना के तहत जरूरतमंदों को मकान निर्माण के लिए ऋण दिया जाना था। इसी योजना का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने अपनी समिति के 186 सदस्यों के नाम पर 1-1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया। इस तरह कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि निकाली गई। रिकॉर्ड में जिन स्थानों पर मकान निर्माण दिखाया गया, वे रायपुरा और पंडरीकांचा क्षेत्र थे। हालांकि, बाद में कराए गए भौतिक सत्यापन में वहां न तो कोई मकान मिला और न ही ऋण लेने वाले कथित हितग्राही मौजूद पाए गए।

फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित प्रमाण पत्रों से रची गई साजिश

जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पूरे मामले में सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित प्रमाण पत्रों का उपयोग किया गया। बताया गया कि उस समय मध्यप्रदेश सहकारी आवास संघ के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के अधिकारियों द्वारा बिना समुचित जांच के ऋण आवेदन स्वीकृत कर मुख्यालय भेजे गए। इसके आधार पर ऋण स्वीकृत किया गया। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य पूर्ण होने के फर्जी प्रमाण पत्र और ऋण उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए। इसमें आवास पर्यवेक्षक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिन्होंने भवन निर्माण पूर्ण होने का प्रमाण पत्र जारी किया।

राशि का बंदरबांट और आरोपियों की स्थिति

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए पूरी राशि का गबन किया और उसे आपस में बांट लिया। इस पूरे घोटाले में सरकारी व्यवस्था की निगरानी प्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। इस प्रकरण में चार नामजद आरोपी थे, जिनमें से दो की मृत्यु हो चुकी है। वहीं, गिरफ्तार दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। ब्यूरो द्वारा कई बार नोटिस तामील कराने का प्रयास किया गया, लेकिन वे अपने पते से गायब मिले और लगातार बचते रहे।

गंभीर धाराओं में मामला दर्ज: पुराने केस फिर से खोल रहा ब्यूरो

मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 406, 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी) के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(सी) एवं 13(2) के तहत अपराध दर्ज है। ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि पुराने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर दोबारा जांच में लिया जा रहा है।

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