छत्तीसगढ़

जशपुर के टांगरगांव में ग्रामीणों के विरोध के आगे झुकी कंपनी, 899 करोड़ का इस्पात संयंत्र निरस्त


प्रस्ताव देने वाली कंपनी मां कुदरगढ़ी एनर्जी एंड इस्पात प्राईवेट लिमिटेड ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए, शासन को एमओयू निरस्त करने का अन…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 09 Sep 2026 08:32:46 PM (IST)Updated Date: Wed, 09 Sep 2026 08:32:46 PM (IST)

जशपुर के टांगरगांव में ग्रामीणों के विरोध के आगे झुकी कंपनी, 899 करोड़ का इस्पात संयंत्र निरस्त
जशपुर के टांगरगांव में ग्रामीणों के विरोध के आगे झुकी कंपनी

HighLights

  1. जशपुर के टांगरगांव में 899 करोड़ का स्टील प्लांट रद
  2. वित्तीय समस्या और भारी विरोध के बाद निरस्त हुआ MOU
  3. कलेक्टर कार्यालय के घेराव के बाद मिली आदेश की कॉपी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जशपुरनगर। जिले के कांसाबेल तहसील के टांगरगांव में प्रस्तावित इस्पात संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव निरस्त हो गया है। प्रस्ताव देने वाली कंपनी मां कुदरगढ़ी एनर्जी एंड इस्पात प्राईवेट लिमिटेड ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए, शासन को एमओयू निरस्त करने का अनुरोध किया था। कंपनी के इस अनुरोध को राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है।

टांगरगांव सहित आसपास के पांच गांव से आए ग्रामीणों को जिला प्रशासन ने यह जानकारी देते हुए, एमओयू निरस्तीकरण आदेश की सत्यापित छाया प्रति उपलब्ध कराई है। दरअसल, बुधवार को दो सौ से अधिक ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। टांगरगांव में स्टील प्लांट स्थापित करने का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने अधिकारियों से निरस्तीकरण आदेश की कॉपी मांगते हुए, कलेक्टर कार्यालय के प्रवेश द्वार में धरने में बैठ गए थे।

जनसुनवाई के नोटिस के बाद लामबंद हुए थे ग्रामीण और आदिवासी संगठन

ग्रामीण अनुरंजन भगत ने बताया कि वर्ष 2021 में टांगरगांव में मां कुदरगढ़ी एनर्जी और इस्पात प्राईवेट लिमिटेड ने इस्पात संयंत्र स्थापित करने के लिए राज्य सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया था। इसके बाद पर्यावरण संरक्षण मंडल ने संयंत्र स्थापना के लिए प्रदूषण संबंधी अनुमति देने के लिए जनसुनवाई करने का नोटिस जारी किया था। नोटिस जारी होते ही ग्रामीण इसके विरोध में लामबंद हो गए थे।

तत्कालीन विपक्षी पार्टी भाजपा और जनजातीय सुरक्षा मंच भी खुलकर इसके विरोध में सामने आ गई थी। लगातार विरोध प्रदर्शन, चक्काजाम व घेराव की स्थिति बनी रही। ग्रामीणों के कड़े प्रतिरोध के बाद सरकार ने इस इस्पात संयंत्र के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पूर्व टांगरगांव के प्रस्तावित जमीन पर कुछ निर्माण कार्य शुरू होने पर ग्रामीणों ने इस्पात संयंत्र स्थापित होने की आशंका जताते हुए, विरोध में लामबंद होने लगे थे। इसके बाद बुधवार को ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे।

कलेक्टर कार्यालय के घेराव के बाद प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चा

निरस्तीकरण आदेश की कॉपी की मांग करते हुए ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय के प्रवेश द्वार पर धरने पर बैठ गए। धरना देने वाले ग्रामीणों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। सुरक्षा के लिए कोतवाली प्रभारी मोरध्वज देशमुख सहित पुलिस बल को तैनात किया गया था। भीड़ के पहुंचते ही पुलिस ने कलेक्टर कार्यालय के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए थे।

जशपुर के एसडीएम व्हीआर मस्के ने धरने में बैठे ग्रामीणों से चर्चा करके पांच लोगों के प्रतिनिधिमंडल की कलेक्टर रोहित व्यास से चर्चा कराई। चर्चा के बाद उद्योग विभाग ने राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड द्वारा जारी किए गए संयंत्र स्थापना के लिए एमओयू को निरस्त करने के आदेश की छाया प्रति उपलब्ध कराई, इसके बाद ग्रामीण वापस लौट गए।

यह थी पूरी योजना: 899 करोड़ रुपये का था प्रोजेक्ट

राज्य सरकार और कंपनी के बीच 12 जुलाई 2021 को हुए एमओयू के अनुसार टांगरगांव में स्पंज आयरन प्लांट, कैप्टिव पावर प्लांट, स्टील मेल्टिंग शॉप, स्टील रोलिंग मिल और सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाना था। इसकी लागत 899 करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह एमओयू अब निरस्त हो चुका है।

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