जग्गी हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट से दोषी करार अमित जोगी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, सरेंडर के आदेश के खिलाफ SLP दायर; 6 अप्रैल को बड़ी सुनवाई

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद करते हुए हत्याकांड के प्रमुख आरोपित अमित जोगी को दोषी करार दिया है। …और पढ़ें

HighLights
- हाई कोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराया
- सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर, जल्द सुनवाई
- तीन सप्ताह में सरेंडर का दिया आदेश
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। रायपुर निवासी व एनसीपी के कोषाध्यक्ष स्व. राम अवतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद करते हुए हत्याकांड के प्रमुख आरोपित अमित जोगी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। वहीं अमित जोगी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। इस पर सोमवार को सुनवाई होगी।
क्या है मामला
राजधानी रायपुर में चार जून 2003 को राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विधानसभा चुनाव के बाद जब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनी, तब मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने हत्याकांड की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया था।
सीबीआई की जांच में यह पर्दाफाश हुआ था कि हत्याकांड के पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी। इसमें भाड़े के शूटरों का इस्तेमाल किया गया था। सीबीआइ जांच में यह भी सामने आया कि उस दौर के कुछ पुलिस अफसरों ने साक्ष्य को छुपाने और असली आरोपितों को बचाने के लिए झूठे गवाह और फर्जी आरोपित तक तैयार किए थे। साल 2007 में मामले की सुनवाई करते हुए विशेष अदालत ने तीन पुलिस अधिकारियों को भी दोषी करार दिया था। ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साक्ष्य में कमी का हवाला देते हुए अमित जोगी को हत्याकांड से बरी कर दिया था।
सीबीआई की याचिका हाई कोर्ट ने कर दी थी खारिज
विशेष अदालत के फैसले जिसमें, अमित जोगी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था, सीबीआइ ने इसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में तकनीकी खामियों के चलते कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। सीबीआइ ने 1,373 दिनों की देरी कर दी थी, जिसके चलते हाई कोर्ट ने इसे खारिज किया था।
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
हाई कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अमित जोगी की रिहाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। नवंबर 2025 में मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले में अमित जोगी पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और यह एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश से जुड़ा है। इस टिप्पणी के साथ सीबीआइ की याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को मामले की सुनवाई करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस रिओपन हुआ और गुरुवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए तीन सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
अमित के वकील ने हाई कोर्ट को दी थी ये जानकारी
अमित जोगी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विकास वालिया ने हाई कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केस रिओपन करने के आदेश को हमने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसके लिए एसएलपी दायर की है।
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